सरकार 2027 से ग्रीन परियोजनाओं में अनिवार्य करेगी बैटरी
जुलाई 2027 से भारत एक नया नियम लागू करने वाला है। इसके तहत, अगले साल 1 जुलाई के बाद जितने भी नए सोलर और तटवर्ती पवन ऊर्जा परियोजनाएं शुरू होंगी, उन सभी में बैटरी स्टोरेज की सुविधा देना अनिवार्य होगा। इसका मकसद है बिजली सप्लाई में आने वाले उतार-चढ़ाव को कम करके ग्रीन एनर्जी को ज्यादा भरोसेमंद बनाना। इन परियोजनाओं में ऐसी बैटरी लगानी होंगी जो अपनी कुल क्षमता का कम से कम 10 प्रतिशत बिजली 2 घंटे तक स्टोर कर सकें। इससे होगा ये कि जब सूरज नहीं होगा या हवा नहीं चलेगी, तब भी बिजली मिलती रहेगी।
4 घंटे तक बिजली स्टोर करने और ग्रिड-फॉर्मिंग इन्वर्टर के प्रस्ताव
वहीं, साल 2029 तक इन बैटरियों को 4 घंटे तक बिजली स्टोर करनी होगी। इनमें भी प्रोजेक्ट की कुल क्षमता का 10 प्रतिशत हिस्सा ही कवर होगा। यह बदलाव कुछ असल समस्याओं को देखते हुए किया जा रहा है। अप्रैल से जून के बीच, लगभग 14 प्रतिशत सोलर बिजली बेकार चली गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दिन के समय जरूरत से ज़्यादा साफ़ ऊर्जा बन रही थी और उसे दूर तक ले जाने के लिए ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी थी। इसके अलावा, जुलाई 2027 के बाद शुरू होने वाले नए स्वच्छ ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में एक और शर्त रखी गई है। उनमें ग्रिड-फॉर्मिंग इन्वर्टर जैसी क्षमताएं भी होनी चाहिए। इससे वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी स्थिर रहेगी। भारत जैसे-जैसे स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ रहा है, ये चीजें रिन्यूएबल एनर्जी को और भी विश्वसनीय बनाएंगी।