दान विवाद से अयोध्या ट्रस्ट की साख पर सवाल, अब 'रामभक्त CEO' वापस लौटाएगा भरोसा?
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चंदे के दुरुपयोग के आरोपों के बाद, अयोध्या मंदिर ट्रस्ट एक नए CEO की तलाश कर रहा है। इसके लिए एक खास समिति बनाई गई है, जो सिर्फ काबिल व्यक्ति नहीं, बल्कि भगवान राम के प्रति गहरा समर्पण रखने वाले शख्स को खोज रही है। ट्रस्ट की सबसे बड़ी प्राथमिकता अब लोगों का खोया भरोसा फिर से जीतना है।
समिति सदस्य बोले- विश्वास फिर से बनाने में सालों लगते हैं
समिति सदस्य सुरेश हावारे ने इस चुनौती की तुलना तिरुपति और शिर्डी जैसे बड़े मंदिरों के संचालन से की। उन्होंने बताया कि एक बार लोगों का विश्वास टूट जाए, तो उसे वापस लाने में कई साल लग जाते हैं। ट्रस्ट को उम्मीद है कि एक नए और समर्पित नेता की अगुवाई में पारदर्शिता बहाल होगी और सभी श्रद्धालुओं को यह विश्वास दिलाया जा सकेगा कि उनका चंदा सुरक्षित हाथों में है।