ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कवर करते हुए 43 पत्रकार हिरासत में- रिपोर्ट
भारत में अब पत्रकारों के लिए विरोध प्रदर्शन कवर करना एक जोखिम भरा काम बन गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करते समय कम से कम 43 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया और कुछ के साथ तो मारपीट भी हुई।
मतदाता सूची में कथित छेड़छाड़ के दावों के कारण शुरू हुए ये प्रदर्शन 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली, अहमदाबाद और पुणे में हुए थे। 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता से यह भरोसा लिया था कि "वकीलों, पत्रकारों और दूसरे पेशों के लोगों को उनके काम में कोई अड़चन नहीं आएगी।"
इसके बावजूद, कई पत्रकारों के उपकरण जब्त कर लिए गए या उन्हें नुकसान पहुंचाया गया।
हिरासत की घटनाएं सिर्फ नई दिल्ली तक सीमित नहीं रहीं
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के अनुसार, ज्यादातर हिरासतें नई दिल्ली में हुईं। हालांकि, अहमदाबाद में ऑल्ट न्यूज की संवाददाता किंजल और पुणे में स्क्रॉल की दिव्या असलेशना के साथ भी ऐसे ही वाकये सामने आए।
मुंबई में भी द क्विंट के स्वाति चोपड़ा और मोहित मनवानी को ऐसे ही प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में ले लिया गया।