18,600 फीट की ऊंचाई, बर्फीली हवाएं और खड़ी ढलान; लद्दाख में सेना का साहसी बचाव अभियान
क्या है खबर?
भारतीय सेना ने लद्दाख के दुर्गम नन कुन इलाके में ऐसा बचाव अभियान चलाया, जिसे देखकर आप भी दांतों तले उंगली दबा लेंगे। 18,600 फीट की ऊंचाई पर तेज और बर्फीली हवाओं के बीच सेना के 2 जाबाज पायलटों ने अपने चीतल हेलीकॉप्टर से एक घायल पर्वतारोही को सफलतापूर्वक बचा लिया। सेना ने बताया कि पायलटों ने असाधारण सटीकता, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ इस बचाव कार्य को अंजाम दिया।
हेलीकॉप्टर
एक ही स्किड पर टिका रहा हेलीकॉप्टर
जब सेना का हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंचा, तो सामने भयंकर बर्फीली हवाएं और खड़ी ढलान थी। लैंडिंग की भी कोई जगह नहीं थी।
ऐसे में पायलटों ने हैरतअंगेज संतुलन बनाते हुए हेलीकॉप्टर को हवा में बेहद नीचे स्थिर रखा और उसका सिर्फ एक स्किड (निचला लैंडिंग स्टैंड) ढलान पर टिकाते हुए संतुलन बनाए रखा।
इसके बाद कुछ ही पलों में मरीज को सुरक्षित तरीके से हेलीकॉप्टर में बैठाया गया और नीचे की उड़ान भरी।
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें बचाव अभियान का वीडियो
Daring High-Altitude Casualty Evacuation 🇮🇳
— @firefurycorps_IA (@firefurycorps) August 29, 2026
In a daring rescue mission at 18,600 ft near Nun Kun, Indian Army Aviation pilots evacuated a casualty from an extremely challenging slope with no landing space and strong winds.
With the helicopter lightened by removing non-essential… pic.twitter.com/NaOyFRWxSR
वजन
वजन कम करने के लिए हेलीकॉप्टर से हटाई गईं गैर-जरूरी चीजें
तेज हवा और ऊंचाई के चलते हेलीकॉप्टर के इंजन की ताकत और रोटर्स की ऊपर उठने की क्षमता काफी कम हो जाती है। इसे देखते हुए पायलटों ने हेलीकॉप्टर से वजन कम करने के लिए सभी गैर-जरूरी चीजों को हटा दिया। यहां तक की ईंधन भी उतना ही भरा गया, जितना अभियान के लिए जरूरी था।
भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने अभियान की जानकारी साझा करते हुए पायलटों के साहस, तकनीकी दक्षता और समर्पण को नमन किया।