दिल्ली की हवा में हुआ 16 प्रतिशत सुधार, स्थानीय प्रदूषण ही है जड़
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने का दिल्ली की हवा पर बहुत कम असर पड़ा। जहां 2024 से 2025 के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में तो काफी कमी आई, वहीं 2025 से 2026 के बीच यह संख्या लगभग उतनी ही रही। इसके बावजूद 2025 और 2026 के बीच दिल्ली के औसत AQI में करीब 16 प्रतिशत का सुधार आया। इसका सीधा मतलब यह है कि दिल्ली की हवा की गुणवत्ता तय करने में बाहरी खेतों से होने वाले प्रदूषण से ज्यादा, शहर के अंदरूनी स्थानीय स्रोतों से निकलने वाला प्रदूषण एक बड़ी वजह है।
दिल्ली का मीडियन AQI बढ़ा
रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां औसत AQI बेहतर हुआ, वहीं सामान्य दिनों में हवा की गुणवत्ता थोड़ी और खराब हो गई यानी मीडियन AQI बढ़ गया। अच्छी बात यह रही कि 'बेहद खराब हवा' वाले दिनों की संख्या 10 से घटकर सिर्फ तीन रह गई। हालांकि, रोजमर्रा के प्रदूषण पर अभी भी ध्यान देने की जरूरत है। मौसम ने भी हालात को और नहीं बिगाड़ा, जबकि इस दौरान बारिश भी कम हुई और अल नीनो का असर भी था। साफ है। दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए स्थानीय प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर नियंत्रण पाना सबसे अहम है।