आंध्र प्रदेश में मलेरिया की दवा खाने के बाद आदिवासी बच्ची की मौत, 70 बीमार पड़े
क्या है खबर?
आंध्र प्रदेश में मलेरिया रोकथाम अभियान के दौरान बांटी गई मलेरिया रोधी गोली (क्लोरोक्वीन) खाने से एक 7 वर्षीय आदिवासी बच्ची की मौत हो गई है। घटना पोलावरम जिले के गोल्लागुप्पा गांव में की है। यहां बच्चों समेत कम से कम 70 लोग बीमार पड़ गए हैं, जिसमें कई अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने घटना की समीक्षा करते हुए मामले के व्यापक जांच के आदेश दिए और प्रभावित लोगों का उपचार सुनिश्चित करने को कहा है।
घटना
क्या है मामला?
आदिवासी गांव गोल्लागुप्पा में मलेरिया की रोकथाम के लिए गौरीदेवीपेटा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने 1 सितंबर को चिकित्सा शिविर लगाया था।
इस दौरान, ग्रामीणों के रक्त परीक्षण किए गए, जिसमें कुछ में मलेरिया की पुष्टि हुई। इसके बाद 27 छात्रों, आंगनवाड़ी के 14 बच्चों और अन्य ग्रामीणों को क्लोरोक्वीन दी गईं।
गोली खाने के बाद GPS स्कूल की कक्षा 2 की छात्रा मादिवी जमुना को उल्टी और पेट में जलन हुई। उसने अस्पताल पहुंचने पर दम तोड़ दिया।
जांच
डॉक्टरों ने छात्रा की मौत पर क्या बताया?
डॉक्टरों को संदेह है कि छात्रा की मृत्यु किसी अंतर्निहित हृदय संबंधी समस्या के कारण हुई होगी। जमुना के परिवार में 2 अन्य शिशुओं की भी एक वर्ष की आयु से पहले अज्ञात कारणों से मृत्यु हो गई थी।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि क्लोरोक्वीन जैसी दवाओं से हृदय संबंधी ऐसी स्थितियों वाले व्यक्तियों में कार्डियक एरिथमिया विकसित होने का जोखिम बहुत कम होता है।
क्लोरोक्वीन की गोलियां लेने के बाद मरीजों को उल्टी होना, डॉक्टर सामान्य बताते हैं।