प्रदर्शनों में दिल्ली पुलिस ने इस्तेमाल किए 'शॉक' और पेलेट गन, एमनेस्टी ने लगाए गंभीर आरोप
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। एमनेस्टी ने बिहार के सीवान जिले में भी ऐसे ही दुर्व्यवहार की पुष्टि की है।
संसद की ओर बढ़ते हजारों प्रदर्शनकारियों के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया और जगह-जगह झड़पें हुईं। इन्हीं झड़पों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। 24 अगस्त को एमनेस्टी ने कुछ सबूत साझा किए थे, जिनसे पता चला कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन, आंसू गैस, ग्रेनेड, लाठीचार्ज और यहां तक कि इलेक्ट्रिक शॉक वाले उपकरणों का भी इस्तेमाल किया था।
एमनेस्टी का आरोप: सीवान में भी इस्तेमाल हुआ जानलेवा बल
एमनेस्टी ने पुलिस के इस दावे को खारिज कर दिया है कि बल का प्रयोग तभी किया गया, जब हालात हिंसक हो गए थे। एमनेस्टी ने इन घटनाओं को राज्य-प्रायोजित हिंसा बताया।
उन्होंने सीवान में हुई 2 ऐसी घटनाओं का भी जिक्र किया, जहां पुलिस ने कथित तौर पर जानलेवा बल का इस्तेमाल किया था, हालांकि इसमें किसी की जान नहीं गई। सुप्रीम कोर्ट ने अब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इन घटनाओं की जांच के लिए एक समिति बना दी है।
राहुल गांधी पेलेट से घायल प्रदर्शनकारी के साथ दिखे
कांग्रेस नेता राहुल गांधी उस 19 साल के प्रदर्शनकारी के साथ धरने पर शामिल हुए, जिसने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस के पेलेट से उसे चोट लगी थी। इस 19 वर्षीय प्रदर्शनकारी की शिकायत के बाद, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था। ये विरोध प्रदर्शन युवाओं की अगुवाई में हुए थे, जो नई दिल्ली और बिहार जैसे कई जगहों पर हुए।