सरकार ने रोकी ईंधन वृद्धि, थोक खरीदारों पर कड़े नियम
दुनियाभर में ऊर्जा का बड़ा संकट गहराया हुआ है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे टकराव के साथ-साथ होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही में आ रही दिक्कतों की वजह से यह संकट और बढ़ गया है। भारत अपनी जरूरत का अधिकतर तेल और LPG खाड़ी देशों से मंगाता है, ऐसे में इस स्थिति पर सबकी पैनी नजर बनी हुई है। हाल ही में ईंधन की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, जिसके बाद दाम पिछले 4 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, अब सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल और दाम नहीं बढ़ाए हैं।
भारत ने थोक में ईंधन खरीदने पर लगाई रोक
थोक खरीदारों को खुदरा पंपों से सस्ता ईंधन खरीदने से रोकने के लिए, सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। इसके तहत, औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत ग्राहकों को 90 दिनों तक आम पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें थोक बिक्री केंद्रों से ही ईंधन खरीदना होगा, जहां इसकी कीमत ज्यादा होती है। साथ ही, कुछ नए नियम भी लागू किए गए हैं। इनके मुताबिक, खुदरा पंपों पर डीजल केवल सीधे वाहनों के फ्यूल टैंक में या PESO द्वारा स्वीकृत कंटेनरों में ही भरा जा सकेगा। एक ग्राहक या वाहन को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। इन सभी कदमों का मकसद आम उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में उछाल से बचाना और स्थानीय स्तर पर कमी व जरूरी सेवाओं में आने वाली बाधाओं को रोकना है।