अब पति की 'छिपी कमाई' नहीं बचेगी! हाई कोर्ट ने कहा- गुजारा भत्ता 'असली' जीवनशैली पर
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अब पत्नी को मिलने वाले गुजारा भत्ते का हिसाब पति की असली कमाई और उसकी जीवनशैली के हिसाब से लगेगा, ना कि उसकी पढ़ाई या पहले किए गए काम के आधार पर। यह फैसला तब आया जब एक महिला ने ज्यादा गुजारा भत्ता की मांग की थी। अदालत ने साफ किया कि अभी वह महिला अपना गुजारा कैसे कर सकती है, यह उसकी पुरानी डिग्री या योग्यता से कहीं ज्यादा अहम है।
अदालत को पति के वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिली
इस मामले में, महिला ने अदालत को बताया कि दहेज की वजह से उसे घर से निकाल दिया गया था। उसने दावा किया कि उसके पति की साल की कमाई करीब 5 करोड़ रुपये है। वहीं पति का कहना था कि उसकी महीने की आमदनी सिर्फ 15,000 से 20,000 रुपये है।
अदालत ने पति के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की और उसमें गड़बड़ी पाई। अदालत ने पाया कि पहले दिया गया 15,000 रुपये महीने का गुजारा भत्ता अब पर्याप्त नहीं है। अब मामला नए सिरे से देखने के लिए भेज दिया गया है। अदालत ने कहा कि गुजारा भत्ता ऐसा होना चाहिए जो शादी के समय के जीवन स्तर से मेल खाता हो।