इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यौन शोषण के मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को यौन शोषण के मामले में सुनवाई करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने आदेश में कहाकि अगली सुनवाई तक शंकराचार्य को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी जाती है। उन्होंने अधिकारियों को शंकराचार्य के खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई से मना किया और जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा है। न्यायाधीश के आदेश सुनाते ही कोर्ट में तालियां बजने लगीं।
सुनवाई
राज्य सरकार ने किया जमानत याचिका का विरोध
शंकराचार्य ने यौन शोषण के आरोपों के बाद 24 फरवरी को हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायाधीश के चंबर में राज्य सरकार के वकील ने FIR पढ़ी और बताया कि मजिस्ट्रेट के सामने नाबालिग बटुक के बयान हो चुके हैं। सरकार ने शंकराचार्य की जमानत याचिका का विरोध किया, जबकि शंकराचार्य के वकील ने कहा कि मामला धार्मिक नेता के खिलाफ पूरी तरह साजिश का है।
सवाल
कोर्ट में शंकराचार्य ने उठाए गंभीर सवाल
शंकराचार्य के वकील ने कोर्ट में गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ जब मारपीट का मामला नहीं बना तो साजिश के तहत POCSO की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि ये दबाव में हुआ है क्योंकि शिकायत करने वाला हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ पहले से गौ-हत्या, दुष्कर्म, हत्या का मामला दर्ज है। वकील ने कहा कि पीड़ित संस्थागत छात्र हैं और उनका मेडिकल एक महीने बाद हुआ है, ये सब सरकार द्वारा प्रायोजित है।
विवाद
क्या है मामला?
प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और भाजपा के बीच टकराव चल रहा था। इस बीच स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने पिछले हफ्ते शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ POCSO के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ 18 जनवरी के आसपास दीक्षा प्राप्त करने आने वाले नाबालिग बटुकों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इसी के तहत गिरफ्तारी को शंकाराचार्य ने चुनौती दी है।