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NGT अदालतों में पर्यावरण से जुड़ीं सभी 16 अपीलें खारिज, उद्योगों के पक्ष में रहे फैसले
NGT अदालतों में साल 2026 के पहले 6 महीने में पर्यावरण से जुड़ीं सभी 16 अपीलें खारिज की गई हैं

NGT अदालतों में पर्यावरण से जुड़ीं सभी 16 अपीलें खारिज, उद्योगों के पक्ष में रहे फैसले

Sep 21, 2026
12:55 pm

क्या है खबर?

साउथ एशियन रिपोर्ट ऑन एनवायरनमेंट लॉ (SAREL) की एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में पर्यावरण और जनहित से जुड़े पक्षों की सफलता दर शून्य रही है। इसके उलट उद्योगों और उनके मालिकों को बड़ी राहत मिली है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद NGT की कार्यप्रणाली और उसकी प्रासंगिकता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

रिपोर्ट

रिपोर्ट में किया गया 2026 में दाखिल की गई 119 अपीलों का आंकलन

SAREL ने जनवरी से जून 2026 के बीच NGT न्यायालय की दिल्ली प्रधान पीठ समेत 5 पीठों द्वारा तय की गई 119 अपीलों का आकलन किया।

इस अवधि में NGT में गुण-दोष के आधार पर तय की गई 67 अपीलों में से पर्यावरणविदों या जनहित याचिका लगाने वालों की ओर से दायर सभी 16 अपीलें पूरी तरह खारिज कर दी गई।

इस हिसाब से इन सभी 5 पीठों में पर्यावरण की भलाई के प्रति सफलता दर शून्य प्रतिशत रही है।

सफलता

NGT न्यायालयों में उद्योगपतियों को मिली बड़ी सफलता

रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना निर्माता, उद्योगपतियों और संपत्ति मालिकों के पक्ष में फैसला आने की दर 58.8 प्रतिशत रही है।

उन्होंने अपनी 51 मेरिट अपीलों में से 30 में अनुकूल आदेश हासिल किए हैं।

इसी तरह कुल 119 अपीलों में से लगभग 44 प्रतिशत यानी 52 अपीलें मेरिट चरण तक पहुंच ही नहीं सकीं।

उन्हें समय-सीमा, अधिकार क्षेत्र, रख-रखाव या याचिका वापस लेने जैसे तकनीकी आधारों पर खारिज कर दिया गया। इससे वे याचिकाएं सुनवाई तक ही नहीं पहुंच पाई।

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प्रदर्शन

कैसा रहा अलग-अलग पीठों का प्रदर्शन?

NGT की पश्चिमी पीठ ने पर्यावरण से जुड़ीं सभी 9 अपीलें खारिज की, जबकि उद्योगों से जुड़ी 24 अपीलों में से 15 में उनके पक्ष में फैसला सुनाया।

दिल्ली पीठ ने पर्यावरण की दोनों अपीलें खारिज की और उद्योगों की 10 अपीलों में से 5 में पक्ष में फैसला सुनाया।

केंद्रीय और दक्षिणी पीठ ने पर्यावरण वाली सभी 3 और दक्षिणी न्यायपीठ ने एकमात्र पर्यावरण अपील खारिज की और उद्योगों की 12 में से 9 में पक्ष में फैसला दिया।

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हमला

कांग्रेस ने केंद्र सरकार और NGT पर बोला हमला

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और NGT पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने एक्स पर लिखा, 'NGT की स्थापना जून 2010 में संसद के एक अधिनियम के माध्यम से प्रभावी और त्वरित पर्यावरणीय न्याय प्रदान करने के लिए की गई थी, लेकिन आज उद्योगों और पर्यावरण संरक्षकों की सफलता के बीच का यह भारी अंतर चिंताजनक है। NGT को अपनी हिम्मत दोबारा खोजनी होगी।'

भविष्य

पर्यावरण कानून का भविष्य और NGT का रुख

इस रिपोर्ट का प्रकाशन NGT के 19-20 सितंबर को हुए 2 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' के साथ हुआ है।

इसमें NGT अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में केवल पर्यावरणीय चुनौतियों की पहचान करना काफी नहीं है, बल्कि ऐसी संस्थाएं और कानून बनाने की जरूरत है जो बदलती परिस्थितियों का जवाब दे सकें।

उन्होंने पर्यावरण कानूनों को तकनीक, नवाचार और सतत वित्त के साथ जोड़कर आगे ले जाने की वकालत की।

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