अखिलेश यादव का राम मंदिर पर बड़ा दावा, कहा- गायब हुआ करोड़ों रुपये का चढ़ावा
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या और राम मंदिर को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं ओर से चढ़ाए गए चढ़ावे में से करोड़ों रुपये गायब होने का सनसनीखेज दावा किया है। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है।
दावा
अखिलेश ने क्या किया दावा?
अखिलेश ने एक्स पर लिखा, 'समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये संवेदनशील समाचार है कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब है। यह मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता। न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।'
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें पोस्ट
समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 7, 2026
ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है।
न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की माँग है…
पलटवार
मंदिर ट्रस्ट के सदस्य ने किया पलटवार
अखिलेश के आरोपों को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने खारिज करते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा, "उन्हें किसी तरह के घोटाले की जानकारी नहीं है। ट्रस्ट में ऐसी गलती होगी ही नहीं। हमारे यहां हर लेन-देन का पूरा लिखित हिसाब-किताब रखा जाता है। इस समय भी सभी लेन-देन सही चल रहे हैं। सद्भावना और प्रेम बना हुआ है। हम लोगों को रामलला पर पूरा विश्वास है। अगर कोई गलती करेगा तो रामलला स्वयं उसे दंड देंगे।"
इतिहास
महंत दिनेंद्र ने याद दिलाया 1994 का इतिहास
महंत दिनेंद्र ने आगे कहा, "1994 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब उन्होंने हमें मार दिया था। उन्हें लगा कि हम मर गए हैं, जबकि हमने केवल 'राम' कहा था। हमारा भगवान राम पर विश्वास तब भी बना रहा। शासन द्वारा उन्हें कोई दंड नहीं मिला, लेकिन भगवान राम ने ऐसा दंड दिया कि वे वहीं समाप्त हो गए। रामजी सब देख रहे हैं, राजनीति करने वाले कुछ भी कह सकते हैं। उन्हें कौन रोक सकता है।"