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अजित पवार विमान हादसा: पिछले साल संसदीय समिति ने चार्टर विमानों को लेकर जताई थी चिंताएं
पिछले साल संसदीय समिति ने विमानन सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई थीं (प्रतीकात्मक तस्वीर)x`

अजित पवार विमान हादसा: पिछले साल संसदीय समिति ने चार्टर विमानों को लेकर जताई थी चिंताएं

लेखन आबिद खान
Jan 28, 2026
05:25 pm

क्या है खबर?

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान हादसे में निधन हो गया है। बीते 7 महीने में दूसरी बार किसी बड़े नेता की जान विमान दुर्घटना में गई है। पिछले साल जून में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी एयर इंडिया विमान हादसे में मारे गए थे। इस घटना ने विमानन सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं। पिछले साल संसदीय समिति ने भी नागरिक उड्डयन सुरक्षा फ्रेमवर्क में खामियों को लेकर चेतावनी दी थी।

रिपोर्ट

समिति ने कहा था- चार्टर सेवाएं बढ़ीं, लेकिन निगरानी तंत्र नहीं

समिति ने चेतावनी दी थी कि उड्डयन क्षेत्र का विस्तार निगरानी क्षमता से आगे निकल रहा है और नॉन-शेड्यूल्ड सेक्टर के कुछ हिस्सों को कड़ी जांच की जरूरत है। समिति ने कहा था कि कॉर्पोरेट जेट और चार्टर सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन सुरक्षा निगरानी तंत्र इस अनुपात में नहीं बढ़ा है, जिससे निगरानी और नियमों को लागू करने में कमजोरियां पैदा हुई हैं। इस समिति की अध्यक्षता JDU सांसद मनोज झा करते हैं।

चार्टर विमानों

चार्टर विमान संचालकों को लेकर समिति ने क्या चिंताएं जताई थीं?

समिति ने कहा था कि कुछ चार्टर ऑपरेटर छोटी तकनीकी और सुरक्षा टीमों के साथ काम करते हैं, जिससे रखरखाव की शेड्यूलिंग और निगरानी प्रभावित हो सकती है। समिति ने कहा था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को औचक निरीक्षण और सख्त ऑडिट के जरिए इसकी निगरानी बढ़ानी चाहिए। समिति ने कहा था कि छोटे ऑपरेटरों के पास वे लेयर्ड ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर नहीं हैं, जो एयरलाइंस कॉकपिट में फैसले लेने में इस्तेमाल करती हैं, खासतौर पर खराब मौसम के दौरान।

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बड़ी बातें

समिति की रिपोर्ट की अहम बातें

समिति ने चार्टर विमानों में फ्लाइट प्लानिंग और मौसम के आकलन के तरीकों को ध्यान देने वालों क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया था। समिति ने कहा कि चार्टर विमानों के लिए जोखिम का मूल्यांकन, वैकल्पिक योजना और रियल-टाइम ऑपरेशनल निगरानी सिर्फ इसलिए कम नहीं की जानी चाहिए, कि वे नॉन-शेड्यूल्ड है। समिति ने सभी निजी ऑपरेटरों के लिए भी अनिवार्य और पूरी तरह से काम करने वाले सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) की मांग की थी।

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DGCA

समिति ने DGCA में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया

समिति ने कहा कि DGCA के पास संसाधन कम और काम ज्यादा है। कर्मचारियों की कमी और बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण ये प्रतिक्रियात्मक मोड में काम करता है। समिति की सिफारिश की थी कि DGCA तकनीकी स्टाफ मजबूत करे, ट्रेनिंग में सुधार करे और घटना के बाद कार्रवाई के बजाय भविष्य की निगरानी के लिए डेटा-संचालित जोखिम मूल्यांकन उपकरणों का उपयोग करे। समिति ने कहा कि बढ़ते विमानन क्षेत्र के हिसाब से सुरक्षा निगरानी भी मजबूत करने की जरूरत है।

ATC

ATC कर्मचारियों की कमी को लेकर भी जताई थी चिंता

समिति ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को विमानन सुरक्षा की रीढ़ बताते हुए चेतावनी दी थी कि व्यस्त हवाई अड्डों पर कंट्रोलर कर्मचारी भारी ट्रैफिक लोड को संभाल रहे हैं। थकान और काम का बोझ खासकर पीक आवर्स या खराब मौसम के दौरान मानवीय त्रुटि का जोखिम बढ़ा सकते हैं। पैनल ने कंट्रोलर की भर्ती में तेजी लाने, थकान को रोकने के लिए रोस्टरिंग में सुधार करने और निगरानी प्रणालियों के आधुनिकीकरण की सिफारिश की थी।

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