भारत में डेटा सेंटर खींच रहे बिजली और पानी, क्या भविष्य पर खतरा?
भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन देश में बन रहे ये नए-नए डेटा सेंटर बिजली और पानी की आपूर्ति पर भारी दबाव बना रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसी अगस्त में राज्यसभा में जानकारी दी थी, जिसके अनुसार, डेटा सेंटर की क्षमता 2020 में 375 मेगावॉट थी जो इस साल बढ़कर लगभग 1,575 मेगावॉट हो गई है।
मुंबई और चेन्नई जैसे शहर इस दौड़ में सबसे आगे हैं, वहीं अब आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्य भी इस काम में जुट रहे हैं।
भारत को 17 GW डेटा-सेंटर की मांग का अनुमान
AI के इतनी तेजी से फैलने के कारण, भारत में डेटा सेंटरों की बिजली की खपत 2031-32 तक 17GW तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में बिजली ग्रिड को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने की जरूरत पड़ेगी।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने आगाह किया है कि अगर ज्यादा डेटा सेंटर बने तो बिजली और पानी की कीमतें बढ़ सकती हैं, खासकर तब, जब इन सारे तकनीकी उपकरणों को ठंडा रखने में भारी मात्रा में संसाधनों की खपत होती है। इस स्थिति को टिकाऊ बनाए रखने के लिए, भारत रिन्यूएबल एनर्जी और स्मार्ट कूलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की तरफ बढ़ रहा है। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के जरिए पानी के इस्तेमाल पर भी पैनी नजर रख रहा है।