अगरतला: 149 साल बाद भी नहीं रुकी बलि की ये परंपरा, सुप्रीम कोर्ट के बावजूद क्यों रही नजरों से दूर?
अगरतला के दुर्गाबाड़ी मंदिर में मंगलवार को महा नवमी पर पशु बलि की 149 साल पुरानी परंपरा निभाई गई। वैसे तो त्रिपुरा हाई कोर्ट ने 2019 में ऐसे अनुष्ठानों पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मंदिरों में पशु बलि पर कुछ पाबंदियां लगाईं। इसी कारण इस साल नियमों का पालन करते हुए इस समारोह को लोगों की नजरों से दूर रखा गया।
अधिकारियों ने माणिक्य राजवंश के लिए समारोह का आयोजन किया
मंदिर में कई लोगों के लिए, खासकर पुजारी जयंत भट्टाचार्जी के लिए, दुर्गा पूजा के दौरान देवी दुर्गा का सम्मान करने के लिए यह बलि एक बहुत अहम हिस्सा है। इस आयोजन को स्थानीय अधिकारी माणिक्य राजवंश के लिए करवाते हैं। इसके बाद, पुलिस एक गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपना सम्मान जताती है। आखिर में त्रिपुरा के पूर्व शाही परिवार के सदस्यों के साथ उज्जैयंता पैलेस में अंतिम रस्में पूरी होती हैं, जिसके साथ ही दुर्गा पूजा के उत्सव इस साल के लिए समाप्त हो जाते हैं।