महाराष्ट्र के मोशी में 9 मौतों के बाद NGT सख्त, जांच समिति गठित की
8 जुलाई को पींपरी-चिंचवड़ के मोशी वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट में कचरे का ढेर ढहने से 9 लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए। इस गंभीर घटना के बाद राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने मामले की तह तक जाने के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस टीम में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB), सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अधिकारी और जिला कलेक्टर शामिल हैं।
कमेटी को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें हादसे से जुड़ी सारी जानकारी और उस पर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा होगा।
MPCB कथित सेटबैक नियम के उल्लंघन की जांच कर रहा
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) इस जांच में सबसे आगे है। बोर्ड यह पता लगा रहा है कि कहीं इस हादसे के पीछे कोई लापरवाही तो नहीं थी या फिर पर्यावरण संबंधी नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या कचरा प्रबंधन के सही तरीकों को नजरअंदाज किया गया था।
खास तौर पर, इस बात की भी जांच हो रही है कि एक प्रशासनिक इमारत को लैंडफिल से सिर्फ 12 मीटर की दूरी पर क्यों बनाया गया, जबकि स्वीकृत प्रस्ताव में कम से कम 30 मीटर की दूरी रखने की शर्त थी। NGT ने 13 अगस्त तक इस पूरे मामले पर साफ-साफ जवाब मांगे हैं। यह जांच सिर्फ हादसे के कारणों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लैंडफिल के पास इमारतों की सुरक्षा और नियमों के बार-बार होने वाले उल्लंघन को लेकर बढ़ती चिंताओं पर भी फोकस करेगी।