SC/ST कानून पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का अहम फैसला, केवल जाति का उल्लेख अब उल्लंघन नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ किया है कि किसी को केवल उसकी जाति से पुकारना (बिना अपमान या नीचा दिखाने की मंशा के) SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट का उल्लंघन नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर अपमान करने का इरादा ही साबित न हो, तो ऐसे में इस कानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
कोर्ट ने समन रद्द किए, IPC केस अभी भी लंबित
यह मामला 2019 में एक हमले की FIR के साथ शुरू हुआ था। शुरुआत में यह सिर्फ मारपीट का मामला था, लेकिन बाद में शिकायतकर्ता ने अपने दर्ज कराए गए बयान में जाति से जुड़े आरोप भी जोड़ दिए।
शिकायतकर्ता का कहना था कि उसने CCTV फुटेज देखकर आरोपियों की पहचान की है। हालांकि, कोर्ट ने इस पूरे मामले में कई बड़ी विसंगतिया पाईं। साथ ही, मेडिकल रिपोर्ट में भी सिर्फ मामूली चोटें ही सामने आयीं। इन्हीं कमियों को देखते हुए कोर्ट ने जाति से संबंधित समन तो रद्द कर दिए है, लेकिन भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत कार्रवाई अभी भी जारी है।