बंगाल की खाड़ी से 'मुरसु' की दस्तक: क्यों है ये पहला तमिल नाम और ढोल से क्या है इसका रिश्ता?
बंगाल की खाड़ी से 'मुरसु' नाम का एक नया चक्रवात भारत की तरफ बढ़ रहा है। यह पहला ऐसा उष्णकटिबंधीय चक्रवात है जिसे तमिल नाम दिया गया है और इस तरह इसने एक नया इतिहास रचा है। चेन्नई के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने इस नाम का सुझाव दिया था। 'मुरसु' तमिल संस्कृति के एक पारंपरिक ढोल का नाम है, जिसका इस्तेमाल चेतावनी देने के लिए होता है। यह नाम अपनी विरासत और चक्रवात के चेतावनी देने के मकसद, दोनों के लिए एकदम सटीक बैठता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने आसान उच्चारण वाले चक्रवात नाम चुने
इस क्षेत्र के लिए चक्रवातों को नाम देने का सिलसिला साल 2004 में शुरू हुआ था। हालांकि, जब पहले वाली नामों की सूची खत्म हो गई, तो ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों से नए नामों के लिए सुझाव मांगे गए। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने 'मुरसु' नाम को 'गति' और 'तेज' जैसे दूसरे नामों के साथ चुना है, ताकि उनका उच्चारण करना आसान हो। मौसम विज्ञान के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक एस बालाचंद्रन ने बताया कि वे ऐसे नाम चाहते थे जो लोगों से आसानी से जुड़ें और जरूरत पड़ने पर सही जानकारी पहुंचा सकें।