जम्मू-कश्मीर: जुलाई में 25 बार बादल फटने से 28 मौतें, विशेषज्ञ बोले- जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार
जुलाई के महीने में जम्मू-कश्मीर को 25 बार बादल फटने जैसी खतरनाक मौसमी आपदा झेलनी पड़ी। इसके बाद आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने कम से कम 28 लोगों की जान ले ली और पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई। श्रीनगर में सिर्फ 2 घंटे की मूसलाधार बारिश से सड़कें पानी-पानी हो गईं।
उधर, पहलगाम में सड़कें और होटल तबाह हो गए, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया और अमरनाथ यात्रा के सीजन में पर्यटन को भी भारी चोट पहुंची।
विशेषज्ञों ने बेहतर बुनियादी ढांचे और तैयारी की मांग की
विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ये आपदाएं और भी भयावह होती जा रही हैं। हिमालय में लगातार बढ़ रहे तापमान से भारी बारिश हो रही है। साथ ही, वनों की अंधाधुंध कटाई और आर्द्रभूमियों के खत्म होने से प्रकृति द्वारा दी गई सुरक्षा भी कम होती जा रही है।
पिछले कई दशकों में जम्मू-कश्मीर ने सबसे सूखे साल का सामना किया है, जिसकी वजह से मिट्टी अचानक हुई भारी बारिश का पानी सोख नहीं पाई। वैज्ञानिक इसे 'क्लाइमेट व्हिपलैश' कहते हैं। वे इन आपदाओं से भविष्य में लोगों को बचाने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारी पर जोर दे रहे हैं।