'दायरा' से पहले, बॉलीवुड ने इन फिल्मों में दिखाया पुलिस मुठभेड़ का असली दंगल
क्या है खबर?
करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म 'दायरा' हर किसी का ध्यान आकर्षित कर रही है। मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित यह एक्शन थ्रिलर पुलिस मुठभेड़ के पीछे छिपे कानून, सस्पेंस और सिस्टम के असली काले सच को खंगालने आ रही है। देखा जाए तो बॉलीवुड पहले भी वास्तविक मुठभेड़ और न्याय के सिस्टम को लेकर बड़ी कानूनी जंग को फिल्मों के जरिए दिखा चुका है। आइए देखें कुछ ऐसी फिल्में, जिन्होंने पुलिस मुठभेड़ों के काले सच को उजागर किया है।
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'अब तक छप्पन' और 'विक्रम वेधा'
नाना पाटेकर की फिल्म 'अब तक छप्पन' मुंबई पुलिस के मुठभेड़ विशेषज्ञ दया नायक के जीवन से प्रेरित मानी जाती है। इसमें पुलिस महकमे के अंदरूनी दवाब और अपराध को बिना किसी मिर्च-मसाले के बेहद संजीदगी से दिखाया गया है।
सैफ अली खान और ऋतिक रोशन की 'विक्रम वेधा' मुठभेड़ और उसके पीछे की नैतिकता पर सवाल उठाती है। इसमें दिखाए गए पुलिस मुठभेड़ का तरीका उत्तर प्रदेश और मुंबई के रियल-लाइफ गैंगस्टर एनकाउंटर ऑपरेशन्स से काफी प्रेरित था।
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'शूटआउट एट लोखंडवाला' और 'शूटआउट एट वडाला'
विवेक ओबेरॉय की फिल्म 'शूटआउट एट लोखंडवाला' 1991 में मुंबई के लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स में पुलिस और गैंगस्टर माया डोलास के बीच हुई असल मुठभेड़ पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया मुठभेड़ बॉलीवुड के सबसे लंबे और सबसे खूनी दृश्यों में गिना जाता है।
'शूटआउट एट वडाला' में जॉन अब्राहम मुख्य किरदार में नजर आए। इसकी कहानी मुंबई पुलिस द्वारा साल 1982 में किए गए इतिहास के पहले आधिकारिक मुठभेड़ पर आधारित है, जिसमें गैंगस्टर मान्या सुर्वे ढेर हुआ था।
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'बाटला हाउस'
जॉन की फिल्म 'बाटला हाउस' भी दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हुए बेहद विवादित 'बाटला हाउस मुठभेड़' पर आधारित है, जिसमें कई आतंकी मारे गए थे।
इस पुलिसिया मुठभेड़ में पुलिस अधिकारी मोहन चंद्र शर्मा भी शहीद हो गए थे।
अब करीना और पृथ्वीराज की 'दायरा' इस विषय को फिर से उठाने और मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में लाने के लिए तैयार है। यह फिल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।