सुजॉय घोष को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने माना नहीं हुआ कॉपीराइट उल्लंघन; ट्रायल की जरूरत नहीं
क्या है खबर?
निर्देशक सुजॉय घोष को लंबे कानूनी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने फिल्म 'कहानी 2' की पटकथा को लेकर उन पर चल रहे कॉपीराइट उल्लंघन के आपराधिक मामले को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने माना कि इस मामले में कॉपीराइट की चोरी का कोई ठोस आधार नहीं और कानूनी ट्रायल की जरूरत नहीं है। इस फैसले के साथ ही सुजॉय के सिर से अब कानूनी तलवार हट गई है।
मामला
कॉपीराइट मामले में मुकदमा रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता लेखक और निर्देशक सुजॉय को एक बड़ी कानूनी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज कॉपीराइट उल्लंघन के आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। ये मामला उनकी चर्चित फिल्म 'कहानी 2: दुर्गा रानी सिंह' की पटकथा चोरी करने के आरोपों से जुड़ा था। जज ने सुजॉय की याचिका स्वीकार करते हुए झारखंड के हजारीबाग स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित सभी आपराधिक कार्यवाहियों को खारिज कर दिया।
आरोप
सुजाॅय पर लगा था स्क्रिप्ट चोरी करने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट में ये विशेष अनुमति याचिका झारखंड हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी, जिसने सुजॉय की आपराधिक कार्रवाई रद्द करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। ये शिकायत हजारीबाग (झारखंड) के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उमेश प्रसाद मेहता द्वारा दर्ज कराई गई थी। मेहता का आरोप था कि विद्या बालन अभिनीत 'कहानी 2', जो सुपरहिट फिल्म 'कहानी' का सीक्वल थी, उनकी लिखी स्क्रिप्ट 'सबक' के कॉपीराइट का उल्लंघन करती है।
शिकायत और आरोप
सुजॉय ने ठुकराए आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी स्क्रिप्ट का उपयोग दिसंबर 2016 में आई फिल्म 'कहानी 2' बनाने के लिए किया गया था। आरोप था कि ये कॉपीराइट अधिनियम की धारा 63 के तहत कॉपीराइट उल्लंघन का अपराध है। इसी आधार पर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई गई थी। सुजॉय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखा था।उनका दावा था कि उन्होंने 'कहानी 2' की स्क्रिप्ट लिखना नवंबर 2012 में ही शुरू कर दिया था।
फैसला
सुजॉय घोष के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुजॉय ने कहा कि उन्होंने कहानी का फाइनल ड्राफ्ट दिसंबर 2013 में ही 'स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन' (SWA) में रजिस्टर करवा लिया था, जो शिकायतकर्ता के बताए जून 2015 से पहले है। निर्देशक ने कभी शिकायतकर्ता से मिलने या उनकी स्क्रिप्ट प्राप्त करने की बात से इनकार किया। झारखंड हाई कोर्ट ने ट्रायल खुला रखा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सुजॉय के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आपराधिक कार्रवाई पूरी तरह रद्द कर दी।