सनी देओल बोले- पाकिस्तान या राजनीति देखकर नहीं बनाई 'बंटवारा 1947', हमारे दिमाग में खोट नहीं
क्या है खबर?
निर्देशक राजकुमार संतोषी और अभिनेता सनी देओल लगभग 2 दशक के बाद आगामी पीरियड ड्रामा 'बंटवारा 1947' में एक साथ वापसी कर रहे हैं। देश के विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी ये फिल्म लाहौर के एक शरणार्थी परिवार की कहानी बताती है, जो एक बुजुर्ग हिंदू महिला की रक्षा करता है। हाल ही में सनी ने अपनी इस फिल्म पर खुलकर चर्चा की और साफ कर दिया कि ये पाकिस्तान या राजनीति को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई है।
दावा
"सिनेमाघर से बाहर निकलकर खुश और संतुष्ट महसूस करेंगे आप"
सनी के लिए सबसे अहम है कि फिल्म दर्शकों को कैसा महसूस कराती है।
हिन्दुस्तान टाइम्स से उन्होंने कहा, "फिल्म देखते वक्त आप सब भूल जाएंगे और सिनेमा में खो जाएंगे। बाहर निकलकर आप खुश और संतुष्ट महसूस करेंगे। यह अहसास कराएगी कि बंटवारा क्या था और मुश्किलों के खिलाफ खड़े रहना कितना जरूरी है। हमने विषय को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश नहीं की है। जो असल विषय है, हमने वही बनाया है, उसे बदला नहीं जा सकता।"
कहानी
सीमा-पार कहानियों के बीच इंसानियत और सच की नई मिसाल
'बंटवारा 1947' असगर वजाहत की किताब 'जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई' पर आधारित है। जहां ज्यादातर सीमा-पार कहानियों में किसी एक पक्ष को सही या गलत दिखाया जाता है, वहीं यह फिल्म बंटवारे के दर्द के बीच इंसानियत को दर्शाती है।
इस पर सनी बोले कि ये कोई सोची-समझी योजना नहीं थी। निर्देशक राजकुमार संतोषी ने कहानी को उसके प्राकृतिक बहाव में रखा है और किरदारों को बिना किसी पक्षपात के बिल्कुल स्वाभाविक रूप में पेश किया है।
नीयत
पाकिस्तान के बारे में सोचकर नहीं बनाई 'बंटवारा 1947'- सनी
इन दिनों हिंदी सिनेमा में पाकिस्तानी किरदारों को विलेन के बजाय आम इंसान के रूप में दिखाना कम ही देखने को मिलता है।
जब सनी देओल से पूछा गया कि क्या 'बंटवारा 1947' का ये पहलू इसे पाकिस्तान में देखने लायक फिल्म और खास बनाएगा तो उन्होंने कहा, "हमने कभी ऐसा सोचकर फिल्म नहीं बनाई। साल 2010 से हमारे पास यह कहानी थी और हमारे दिमाग में कोई खोट नहीं है, हम बस एक सच्ची कहानी बयां कर रहे हैं।"
फिल्म
पाकिस्तान में हिंदू महिला की रक्षा करेंगे सनी देओल
'बंटवारा 1947' में सनी ऐसे मुस्लिम व्यक्ति के किरदार में हैं, जो बंटवारे के दौरान पाकिस्तान जाते हैं। वहां अपने घर की ऊपरी मंजिल पर उन्हें एक हिंदू महिला (शबाना आजमी) मिलती है, जो घर खाली करने से इनकार कर देती है।
हिंसा और अराजकता के उस दौर में सनी न सिर्फ अपने परिवार को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि उस महिला की रक्षा की जिम्मेदारी भी उठाते हैं। इस फिल्म से प्रीति जिंटा 7 साल बाद वापसी कर रही हैं।