सोनू निगम ने बयां किया दर्द, बोले- रॉयल्टी मांगी तो टी-सीरीज और Zee म्यूजिक ने बैन लगा दिया
सोनू निगम ने हल ही में बताया कि जब उनका करियर सफलता के शिखर पर था और उनके एल्बम व गाने बेहद पसंद किए जा रहे थे, तब उन्होंने गायकों के कॉपीराइट और रॉयल्टी के हक के लिए आवाज उठानी शुरू की। उनका मानना था कि गानों की सफलता से होने वाली कमाई में उन गायकों को भी उचित हिस्सा मिलना चाहिए, जिन्होंने उसमें अपनी आवाज दी है।
हालांकि, उनके इस जायज कदम का टी-सीरीज और Zee म्यूजिक जैसी बड़ी संगीत कंपनियों ने विरोध किया। इन कंपनियों ने सोनू निगम पर यह कहकर अनघोषित पाबंदी लगा दी कि वो गायक से अब एक 'आंदोलनकारी' बन चुके हैं'।
म्यूजिक कंपनियों ने छीने गाने, फिर 2012 के कानून ने बदली किस्मत
बेहतर कॉन्ट्रैक्ट्स और अपने अधिकारों की इस लड़ाई में सोनू निगम इंडस्ट्री में अकेले पड़ गए थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कंपनियों की गलत शर्तें मानने से इनकार किया तो उनके गाए गानों को दूसरे गायकों की आवाज में डब कर दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने इस लड़ाई को बेहद जरूरी माना और लता मंगेशकर जैसी महान गायिका के दिखाए रास्ते पर डटे रहे।
साल 2012 में जब 'कॉपीराइट संशोधन कानून' लागू हुआ तो गायकों को रॉयल्टी मिलने का रास्ता साफ हुआ। सोनू निगम ने इस पर कहा, "किसी न किसी को तो बिल्ली के गले में घंटी बांधनी ही थी।" समय बदला और वही म्यूजिक कंपनियां उनके पास वापस आईं। अब उनके रिश्ते कंपनियों के साथ बिल्कुल ठीक हैं।