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CBFC की नई गाइडलाइन पर भड़के 'सतलुज' के निर्देशक, बोले- ये कायरता और तानाशाही
'सतलुज' के निर्देशक ने जताई नाराजगी

CBFC की नई गाइडलाइन पर भड़के 'सतलुज' के निर्देशक, बोले- ये कायरता और तानाशाही

Nov 03, 2026
03:16 pm

क्या है खबर?

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' के निर्देशक हनी त्रेहान ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के नए फरमान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आलोचना की है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने इसे "कायरता और तानाशाही" बताया और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल उठाए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित फिल्म 'सतलुज' लंबी कानूनी लड़ाई के बावजूद कभी रिलीज नहीं हो पाई।

प्रतिक्रिया

CBFC की गाइडलाइन पर क्या बोले निर्देशक?

त्रेहान ने अपने इंस्टाग्राम पर 'सतलुज' का एक पोस्टर साझा किया और अभिव्यक्ति की आजादी पर चिंता जताई।

उन्होंने लिखा, 'नई गाइडलाइंस देश में कायरता और तानाशाही को दिखाती हैं और इस बात को रेखांकित करती हैं कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर लोकतांत्रिक रवैया नहीं अपनाया जा रहा है।'

बता दें, सेंसर प्रमाणपत्र की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 'सतलुज' को इस साल ZEE5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन 2 दिन के अंदर हटा दिया गया।

गाइडलाइन

क्या है CBFC की नई गाइडलाइन

2 नवंबर को सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि अब से अधूरी फिल्मों को प्रमाणपत्र के लिए बढ़ावा नहीं मिलेगा। प्रमोशन या आवेदन में इस्तेमाल फिल्म के नाम को अंतिम नहीं माना जाएगा।

फिल्म को सेंसरशिप के लिए भेजने से पहले पूरी तरह तैयार करना जरूरी होगा। बोर्ड नियमानुसार ही सेंसर प्रक्रिया पूरी करेगा, भले रिलीज तारीख घोषित हो चुकी हो।

निर्माताओं द्वारा खुद तय की गई रिलीज तारीख के लिए बोर्ड जिम्मेदार नहीं होगा।

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