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राम गोपाल वर्मा सेंसर बोर्ड पर भड़के, पूछा- सरकार चुन सकते हैं तो फिल्म क्यों नहीं?
राम गोपाल वर्मा ने की सेंसर बोर्ड बंद करने की मांग

राम गोपाल वर्मा सेंसर बोर्ड पर भड़के, पूछा- सरकार चुन सकते हैं तो फिल्म क्यों नहीं?

Jul 15, 2026
06:36 pm

क्या है खबर?

निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने भारत में फिल्म सेंसरशिप पर तीखा हमला बोलते हुए सेंसर बोर्ड को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। सोशल मीडिया पर एक कड़े पोस्ट में उन्होंने तर्क दिया कि सेंसरशिप दर्शकों का अपमान है। वर्मा ने सवाल उठाया कि जब वयस्क वोट दे सकते हैं और परिवार या बिजनेस संभाल सकते हैं तो वे अपनी पसंद की फिल्म खुद क्यों नहीं चुन सकते?

मांग

सेंसर बोर्ड को तुरंत बैन करो- वर्मा

वर्मा ने अपने पोस्ट की शुरुआत 'सेंसर को प्रतिबंधित (बैन) किया जाना चाहिए' लिखकर की।

उन्होंने आगे लिखा कि मौजूदा डिजिटल युग में फिल्मों को सेंसर करना पूरी तरह तर्कहीन है। वर्तमान व्यवस्था को बुनियादी रूप से दोषपूर्ण बताते हुए उन्होंने सरकार द्वारा नियुक्त समिति के सदस्यों की योग्यता पर सवाल उठाए, जो यह तय करते हैं कि दर्शक क्या देख सकते हैं और क्या नहीं।

उनके मुताबिक, सेंसर बोर्ड द्वारा वयस्कों को फिल्मों से बचाना बिल्कुल बेवकूफी है।

सवाल

वोट देकर सरकार चुन सकते हैं तो अपनी पसंद की फिल्म क्यों नहीं?

निर्देशक ने लिखा कि स्मार्टफोन और ग्लोबल स्ट्रीमिंग के इस दौर में सेंसर बोर्ड द्वारा वयस्कों को किसी फिल्ममेकर के नजरिए से बचाना पूरी तरह मूर्खतापूर्ण है। उन्होंने सरकार के इस रवैये को बेहद विरोधाभासी बताया।

वर्मा ने सवाल उठाया कि जब देश के नागरिक वोट देकर सरकार चुन सकते हैं और देश का भविष्य तय कर सकते हैं तो वे अपनी पसंद की फिल्में खुद क्यों नहीं चुन सकते? वयस्कों पर सरकार का ऐसा अविश्वास समझ से परे है।

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ट्विटर पोस्ट

यहां देखिए राम गोपाल वर्मा का पोस्ट

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दो टूक

सेंसरशिप समाज की सुरक्षा नहीं, बल्कि वयस्कों को नासमझ समझना है

वर्मा ने लिखा, 'एक 18 साल का युवा देश का नेता चुन सकता है, लेकिन किसी गाली को सुनने या किसी शॉट को देखने से वो बिगड़ जाएगा या नहीं, ये तय करने के लिए उसे सेंसर कमेटी के किसी अनजान सदस्य की जरूरत पड़ती है। ये समाज की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि वयस्कों को नासमझ (बच्चा) समझना है।"

'सत्या' के निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने इंटरनेट के इस दौर में सेंसरशिप के प्रभावी होने पर भी सवाल उठाए।

आग्रह

फिल्म निर्माताओं से की एकजुट होने की अपील

वर्मा के अनुसार, फिल्मों के सीन काटना बेकार है क्योंकि अनकट वर्जन तुरंत इंटरनेट और टेलीग्राम पर लीक हो जाता है। सेंसरशिप से कंटेंट छिपने के बजाय उसकी मांग और उत्सुकता बढ़ जाती है, जैसा हॉलीवुड फिल्म 'ऑब्सेशन' के साथ हुआ, इसलिए, उन्होंने निर्माताओं से अपील की है कि वे सेंसर बोर्ड के मनमाने कट्स को चुपचाप स्वीकार करना बंद करें और कानूनी व सार्वजनिक मंचों पर इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं।

चुनौती

सिनेमा की काट-छांट तरक्की के लिए आत्मघाती

निर्देशक ने पोस्ट के अंत में लिखा, 'मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि फिल्म इंडस्ट्री को कोर्ट और सार्वजनिक मंचों, दोनों जगह मौजूदा रूप में सेंसर बोर्ड के वजूद को ही चुनौती देने के लिए एकजुट होना चाहिए। लोकतंत्र अभिव्यक्ति की आजादी की मांग करता है और इस जुड़ी हुई दुनिया में सिनेमा को अलग-थलग करना और उसकी काट-छांट करना केवल आंख-कान बंद करने जैसा नहीं है, बल्कि ये हमारी तरक्की के लिए आत्मघाती भी है।'

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