अक्षय कुमार के नोटिस पर परेश रावल बोले- वो आहत होंगे कि मैंने ना कैसे कहा
क्या है खबर?
पिछले साल जब अभिनेता परेश रावल ने 'हेरा फेरी 3' से अलग होने की घोषणा की थी, तब उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। पिछले दिनों निर्देशक प्रियदर्शन ने भी ये खुलासा किया है कि वो इस फिल्म का निर्देशन अब नहीं करेंगे। हाल ही में एक इंटरव्यू में परेश ने फिल्म छोड़ने के पीछे की वजह का खुलासा किया है और साथ ही अक्षय कुमार द्वारा उन्हें भेजे गए कानूनी नोटिस पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
वजह
परेश ने अक्षय की वजह से नहीं छोड़ी फिल्म
विक्की लालवानी से बातचीत में परेश ने स्पष्ट किया कि फिल्म से उनके बाहर होने का अक्षय संग काम करने में असहजता से कोई लेना-देना नहीं था।
उन्होंने कहा, "ऐसा बिल्कुल नहीं था कि मैं अक्षय के साथ काम करने में असहज महसूस कर रहा हूं। ये एक कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का मामला था। अगर मुझे 'हेरा फेरी 3' करनी थी तो मुझे निर्माता फिरोज नाडियाडवाला की मंजूरी की जरूरत थी, क्योंकि 'हेरा फेरी' फ्रेंचाइजी के एकमात्र मालिक वही हैं।"
खुलासा
नोटिस मिलते ही परेश ने खींचे थे 'हेरा फेरी 3' से हाथ
परेश बोले, "और यही बात 'आवारा पागल दीवाना', 'वेलकम' जैसी उनकी अन्य फिल्मों पर भी लागू होती थी। जब तक मुझे फिरोज की मंजूरी नहीं मिल जाती, मैं किसी भी तरह की प्रतिबद्धता नहीं जता सकता था, लेकिन जब मुझे कानूनी नोटिस मिला तो मैंने सोचा कि मैं इस कानूनी पचड़े में क्यों घसीटा जा रहा हूं? क्या मैं यहां फिल्म बनाने का मजा लेने आया हूं या इस सब में फंसने के लिए?"
हर्जाना
अक्षय ने परेश से मांगा था 25 करोड़ का हर्जाना
परेश ने कहा, "तभी मैंने खुद से कह दिया था कि मैं अब इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बनना चाहता।"
परेश के फिल्म से बाहर होने के बाद अक्षय (जो इस फिल्म का निर्माता भी हैं) ने अनुबंध के उल्लंघन और काम को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए 25 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की थी। ये विवाद कई महीनों तक चलता रहा और आखिरकार तब सुलझा, जब परेश इस प्रोजेक्ट में वापस लौटने के लिए सहमत हो गए।
प्रतिक्रिया
कानूनी नोटिस पर क्या बोले परेश?
अक्षय के कानूनी नोटिस पर परेश बोले, "मेरा सचमुच मानना है कि वो कानूनी नोटिस एक भावनात्मक प्रतिक्रिया थी। शायद ये कुछ ऐसा मामला था कि वो मुझे ना कैसे कह सकता है? अक्षय भावनात्मक रूप से आहत हुए होंगे। हमने कभी असल में बैठकर इस पर चर्चा नहीं की, लेकिन इसके बाद हमने साथ में काम किया। कभी-कभार आपको शब्दों को कहने की जरूरत भी नहीं होती। इस तरह के मामलों को सुलझाने का यही एक गरिमापूर्ण तरीका है।"