फिल्मों में ड्रग्स वाले सीन पर सरकार का बड़ा फैसला, चेतावनी नहीं तो नहीं मिलेगा सर्टिफिकेट
क्या है खबर?
फिल्मों में नशे से जुड़े सीन दिखाने को लेकर केंद्र सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब किसी फिल्म में नशीली दवाओं के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी से जुड़े दृश्य होंगे तो उनके साथ एंटी-ड्रग चेतावनी दिखाना जरूरी होगा। नियम 16 सितंबर से लागू संशोधित फिल्म प्रमाणन दिशा-निर्देशों का हिस्सा है। अगर ऐसे सीन में तय चेतावनी नहीं दिखाई गई तो फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। सरकार ने इसे अनिवार्य कर दिया है।
नियम
फिल्मी दृश्यों पर एंटी-ड्रग चेतावनी अनिवार्य
केंद्र सरकार ने फिल्मों के प्रमाणीकरण नियमों में संशोधन कर एंटी-ड्रग चेतावनी अनिवार्य कर दी है।
अब किसी भी फिल्म में नशीले पदार्थों (ड्रग्स) के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी वाले दृश्यों के दौरान स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी दिखाना आवश्यक होगा।
संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत ऐसे दृश्यों पर ये चेतावनी प्रदर्शित करनी होगी- अवैध मादक पदार्थ स्वास्थ्य को नष्ट करते हैं और कारावास की गारंटी देते हैं। ड्रग्स को ना कहें।" बिना इस चेतावनी के फिल्मों को प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा।
अधिसूचना
सूचना और प्रसारण मंत्रालय की अधिसूचना
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर को सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत संशोधित दिशानिर्देश अधिसूचित किए।
ये कदम पिछले प्रमाणन नियमों में एक बड़ा बदलाव है। पहले के नियमों में सेंसर बोर्ड (CBFC) को केवल ये सुनिश्चित करना होता था कि फिल्म में नशे की लत को बढ़ावा देने, सही ठहराने या ग्लैमरस बनाने वाले दृश्य न दिखाए जाएं।
हालांकि, उसमें पर्दे पर अलग से कोई विशिष्ट एंटी-ड्रग चेतावनी प्रदर्शित करने का नियम शामिल नहीं था।
निर्देश
सूचना और प्रसारण मंत्रालय का OTT और टीवी चैनलों को भी निर्देश
पिछले महीने मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स को भी नशीले पदार्थों के सेवन वाले दृश्यों के दौरान यही चेतावनी प्रमुखता से दिखाने का निर्देश दिया था।
निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए भी ऐसी ही एडवाइजरी जारी की गई थी।
बता दें कि ये फिल्म प्रमाणन दिशा-निर्देश उन सिद्धांतों को तय करते हैं, जिनका पालन सेंसर बोर्ड (CBFC) को सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत फिल्मों की जांच करते समय करना अनिवार्य होता है।
सख्ती
नशे, हिंसा और यौन सामग्री पर सख्ती
दिशा-निर्देशों में मई 2025 में संशोधन कर तीन आयु-आधारित श्रेणियां (U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+) शामिल की गई थीं।
इनके तहत बोर्ड को ये सुनिश्चित करना होता है कि हिंसा, असामाजिक गतिविधियों, अपराध के तरीकों और नशे की लत को बढ़ावा न दिया जाए।
साथ ही, यौन सामग्री, क्रूरता और देश की सुरक्षा, संप्रभुता या लोक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले दृश्यों पर भी सख्त नियंत्रण रखा जाता है।
नया बोर्ड
CBFC के नए बोर्ड का ऐलान
केंद्र सरकार ने सेंसर बोर्ड (CBFC) का पुनर्गठन करते हुए 18 सदस्यीय नए बोर्ड की घोषणा की है।
इस नए बोर्ड में प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, पल्लवी जोशी, प्रसेनजीत चटर्जी, रूपाली गांगुली, मनोज जोशी, निशिगंधा वाड, प्रियदर्शन, रिकी केज, हंसराज हंस, अभिषेक जैन, नीला माधव पांडा, सुप्रिया यारलागड्डा, विनोद अनुपम, यतींद्र मिश्र, वामन केंद्रे और रमेश पतंगे शामिल हैं।
नया बोर्ड शशि शेखर वेम्पति की अध्यक्षता में काम करेगा। इस पुनर्गठित बोर्ड का कार्यकाल 3 साल का होगा।