#NewsBytesExclusive: अनुराग कश्यप सेट पर कैसा करते हैं बर्ताव? 'कैनेडी' के आमिर दलवी ने खोला राज
क्या है खबर?
अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी और सनी लियोनी की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'कैनेडी' ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में 7 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन पाकर इतिहास रचा था। अब ये फिल्म OTT पर भी दर्शकों का दिल जीत रही है। फिल्म में गैंगस्टर (सलीम कट्टावाला) बन अपनी खलनायकी से वाहवाही लूटने वाले चर्चित अभिनेता आमिर दलवी ने हाल ही में न्यूजबाइट्स के साथ फिल्म से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के कुछ खास अंश।
तारीफ
फिल्म में अपने किरदार को मिली सराहना पर कही ये बात
आमिर बोले, "बहुत खुशी होती है, जब आपकी मेहनत रंग लाती है। फिल्म के साथ-साथ आपके किरदार को भी लोगों का प्यार मिलता है तो वो एहसास बेहद खास होता है। 'कैनेडी' को दुनियाभर में सराहना मिलना हमारे लिए बड़ी बात है। जब लोग व्यक्तिगत तौर पर मेरे काम की तारीफ करते हैं तो लगता है कि एक कलाकार के तौर पर मेरी कोशिश सफल रही। आखिरकार हम कलाकार दर्शकों के प्यार और सराहना के लिए ही काम करते हैं।"
उत्साह
अनुराग का नाम सुनते ही भरी फिल्म के लिए हामी
जब आमिर को 'कैनेडी' में काम करने का प्रस्ताव मिला तो उनकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी, इसके जवाब में वो बोले, "ईमानदारी से कहूं तो मेरे लिए वो पल बहुत ही खुशी और उत्साह से भरा था। मेरी सबसे पहली और सबसे बड़ी खुशी की वजह ये थी कि मुझे अनुराग कश्यप के साथ काम करने का मौका मिल रहा था। यकीन मानिए मेरे पास जब ऑफर आया तो रोल क्या है, कैसा है, ये सब बातें बाद में आईं।"
तरीका
सेट पर किस तरह से काम करते हैं अनुराग कश्यप?
आमिर के मुताबिक, अनुराग के साथ काम करना किसी रोमांच से कम नहीं है। उन्होंने बताया, "अनुराग पहले से कोई स्क्रिप्ट नहीं देते, बल्कि सीधे सेट पर बुलाकर सीन समझाते हैं। वो आपको पूरी आजादी देते हैं कि आप अपनी समझ से उस किरदार को जिएं। उनके साथ काम करके मैंने ये तो सीख लिया कि कैसे बिना किसी पूर्व तैयारी के अभिनय किया जाता है। ये अनुभव मुझे एक अभिनेता के तौर पर अधिक परिपक्व और सहज बनाता है।"
अनुभव
"हौव्वा नहीं, अपनेपन का होता है एहसास"
आमिर कहते हैं, "अनुराग संग काम करना किसी मास्टरक्लास से कम नहीं। 'कैनेडी' में उन्हें मेरा काम इतना पसंद आया कि उन्होंने अपने प्रोडक्शन की अगली शॉर्ट फिल्म के लिए भी मुझे ही चुना। अनुराग सेट पर किसी 'हौव्वे' की तरह नहीं, बल्कि एक मस्तमौला इंसान की तरह रहते हैं। उनकी सादगी और काम के प्रति उनका समर्पण कमाल का है। वो जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं, जिनके सेट पर टीम को घबराहट नहीं, बल्कि अपनापन महसूस होता है।"
फायदा
कंटेंट और मुनाफे की जंग पर क्या बोले अमित?
बॉलीवुड में बढ़ते व्यावसायीकरण पर आमिर का मानना है कि इसके लिए केवल किसी एक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर दर्शक ही अच्छे सिनेमा का समर्थन नहीं करेंगे तो निर्माता अकेले क्या कर लेंगे? उनके अनुसार, सिर्फ कला के बलबूते टिकना मुश्किल है और फिल्म का बिकना भी उतना ही जरूरी है। आज के दौर में दर्शकों को खुद अपना जायका बदलना होगा, क्योंकि उनकी पसंद ही फिल्म इंडस्ट्री की भविष्य और दिशा तय करेगी।
माध्यम
टीवी और फिल्मों के बीच अतंर पर कही ये बात
टीवी और बॉलीवुड के अंतर पर आमिर बोले कि काम चाहे फिल्म का हो या टीवी का, मकसद महज मनोरंजन ही होता है। हालांकि, फिल्मों में किरदारों को निखारने के लिए ज्यादा वक्त मिलता है। आमिर ने कहा कि ये सच है कि टीवी से आए कलाकारों के लिए फिल्म इंडस्ट्री में राह मुश्किल होती है, लेकिन उनकी मानें तो सब मेहनत और नसीब का मेल और खेल है। टीवी से निकलकर ही शाहरुख खान साहब 'किंग खान' बन गए।"
पक्षपात
बॉलीवुड में भेदभाव पर क्या बाेले आमिर?
आमिर ने माना कि स्टार किड्स को काम आसानी से मिलता है और भेदभाव हर जगह है, लेकिन सब इंसान के नजरिए का खेल है। वो बोले, "मैं कभी रोना नहीं रोता कि मुझे काम क्यों नहीं मिला, बल्कि ये सोचता हूं कि शायद उस रोल के लिए मुझसे बेहतर कोई और था। अगर इंसान हर वक्त शिकायतों का पिटारा लेकर बैठेगा तो वो जीते-जी मर जाएगा। याद रखिए, जो आपके नसीब में लिखा है, उसे कोई छीन नहीं सकता।"
तमन्ना
हटके सिनेमा और पसंदीदा सितारे- आमिर की बड़ी ख्वाहिश
आमिर ने बातचीत के अंत में कहा कि वो विक्रमादित्य मोटवानी, अनुभव सिन्हा, फरहान अख्तर, रोहित शेट्टी और नितेश तिवारी जैसे निर्देशकों के साथ काम करना चाहते हैं, जो अपने 'हटके' सिनेमा के लिए मशहूर हैं। कलाकारों की बात चली तो आमिर ने बताया कि वो बचपन से काजोल के बड़े प्रशंसक रहे हैं, वहीं माधुरी दीक्षित और संजय दत्त के प्रति भी खास लगाव रहा है। नई पीढ़ी में आमिर की आलिया भट्ट संग काम करने की ख्वाहिश है।