
ऋषि कपूर को याद करते हुए नीतू कपूर ने किया डॉक्टर्स का धन्यवाद
क्या है खबर?
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर ने 30 अप्रैल को हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
उन्होंने मुंबई में स्थित HN अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली। उनका इस तरह अचानक निधन हर किसी के लिए हैरान करने वाली खबर थी।
नीतू कपूर लगातार सोशल मीडिया पर पति ऋषि कपूर की तस्वीरें पोस्ट कर उन्हें याद कर रही हैं।
अब उन्होंने अस्पताल के डॉक्टर्स का शुक्रिया ऐडा किया है।
धन्यवाद
नीतू कपूर ने अदा किया डॉक्टर्स का शुक्रिया
नीतू ने इंस्टाग्राम पर ऋषि कपूर की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें पोस्ट करते हुए इसके साथ HN अस्पताल के डॉक्टर्स का शुक्रिया अदा किया है।
उन्होंने लिखा, 'एक परिवार के तौर पर हमें नुकसान हुआ है। जब हम साथ बैठकर पिछले कुछ महीनों की ओर मुड़कर देखते हैं तो हमें HN रिलायंस हॉस्पिटल के डॉक्टर्स के प्रति आभार लगता है।'
उन्होंने आगे लिखा, 'डॉक्टर्स और नर्स की टीम ने मेरे पति का अपनों की तरह ध्यान रखा।'
अंतिम क्रिया
रविवार को रणबीर कपूर ने विसर्जित की थी ऋषि कपूर की अस्थियां
ऋषि कपूर के निधन के बाद हाल ही में उनके घर पर प्रेयर मीट रखी गई थी। जिसकी कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।
इनमें से एक तस्वीर में रणबीर और नीतू कपूर, ऋषि कपूर की तस्वीर के पास बैठे हुए दिख रहे हैं।
वहीं कल शाम को रणबीर ने बाणगंगा में पिता ऋषि कपूर की अस्थियां भी विसर्जित कर दी।
इस दौरान उनके साथ मां नीतू, बहन रिद्धिमा, आलिया भट्ट और अयान मुखर्जी भी मौजूद थे।
बेटी
रिद्धिमा कपूर नहीं कर पाई थीं पिता के आखिरी दर्शन
गौरतलब है कि ऋषि कपूर की लाडली बेटी रिद्धिमा कपूर दिल्ली में रहती हैं।
ऋषि कपूर का निधन उस समय जब देशभर में लॉकडाउन किया गया है। इस कारण वह पिता की मौत की खबर मिलने पर भी उनके आखिरी दर्शन करने नहीं पहुंच पाईं।
लाख कोशिशों के बाद भी रिद्धिमा 18 घंटों बाद मुंबई अपने परिवार के पास पहुंची।
इस दौरान उनके साथ पति भारत साहनी और बेटी सामारा भी मौजूद थी।
स्टेटमेंट
नीतू कपूर ने लिखा था कपूर परिवार की ओर से इमोशनल पोस्ट
नीतू कपूर ने हाल ही में ऋषि कपूर की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए पूरे कपूर परिवार की ओर से एक स्टेटमेंट जारी किया था।
उन्होंने इसमें लिखा था कि ऋषि का ध्यान हमेशा से ही अपने परिवार, दोस्तों और फिल्मों पर फोकस रहा है।
वह अपनी बीमारी में भी खुश रहते थे। अक्सर लोग यह देखकर हैरान होते थे।
उनकी इच्छा थी कि उन्हें आंसुओं से नहीं, बल्कि मुस्कान के साथ विदा किया जाए।'