
उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई 'मिर्जापुर 2', जानिए कैसी है वेब सीरीज
क्या है खबर?
लगभग दो साल के लंबे इंतजार के बाद अमेजन प्राइम की सुपरहिट वेब सीरीज 'मिर्जापुर 2' आखिरकार दर्शकों के बीच पेश हो चुकी है। इस सीजन में भी मुन्ना त्रिपाठी, गुड्डू पंडित और कालीन भईया भौकाल मचाते हुए दिख रहे हैं।
दूसरे सीजन में भी पहले की तरह खुलेआम लोगों का खून तो बहाया जा रहा है, लेकिन इस बार प्यार, रिश्ते और बदले की भावनाओं को भी दिखाया गया है।
आइए जानते हैं कैसी 'मिर्जापुर 2'।
कहानी
साजिश और बदले की आग आई नजर
'मिर्जापुर 2' की कहानी बदले की भावना में तड़प रहे घायल गुड्डू पंड़ित (अली फजल) और गोलू (श्वेता त्रिपाठी) से शुरु होती है, जो मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदू शर्मा) से बदला लेकर मिर्जापुर की गद्दी पर राज करना चाहते हैं।
इधर, मिर्जापुर पर राज करने की चाहत में रतिशंकर के बेटे शरद शुक्ला (अंजुम शर्मा) मुन्ना से हाथ मिलाते हैं। जबकि कालीन भईया (पंकज त्रिपाठी) अपने धंधे को और बेहतर बनाने के लिए राजनीतिक दाव-पेंच में ज्यादा रमें हुए दिखाई दिए।
अंत
तीसरे सीजन की उत्सुकता बढ़ाते हुए किया गया अंत
चुनावी रैलियों के दौरान मुन्ना और मुख्यमंत्री की बेटी माधुरी यादव (ईशा तलवार) के बीच नजदीकियां बढ़ जाती हैं।
इस बार बिहार के भी एक गैंग को भी जोड़ा गया है। अब गुड्डू, मुन्ना और कालीन भईया यहां भी धंधा बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन यहां दद्दा त्यागी (लिलिपुट) और उनके जुड़वा बेटों (विजय शर्मा) का राज है।
वहीं, इसका अंत भी तीसरे सीजन के लिए उत्सुकता बढ़ाते हुए किया गया है।
फीमेल किरदार
महिलाओं ने मचाया 'मिर्जापुर 2' में भौकाल
'मिर्जापुर 2' में भौकाल मचाने का श्रेय अगर महिलाओं को दिया जाए तो गलत नहीं होगा। इस बार हर पुरुष की बर्बादी या कामयाबी में किसी न किसी तरह महिला किरदार ही जुड़ा है।
इस सीजन में कालीन भईया की पत्नी बीना (रसिका दुग्गल) का किरदार उभरकर सामने आया है। जो जबरदस्त तरीके से पूरे त्रिपाठी परिवार की नींव को हिलाने में कामयाब साबित होती हैं।
वहीं, बदले की आग में जल रही गोलू ने बखूबी, गुड्डू को संभालकर रखा।
अभिनय
पहले से ज्यादा दमदार दिखे गुड्डू पंड़ित
'मिर्जापुर' सीरीज में हर किरदार को लेकर खास ध्यान दिया गया। वैसे, इस बार कुछ नए किरदार भी दिखे हैं।
गुड्डू पंडित इस बार पहले से भी ज्यादा दमदार दिख रहे हैं। उन्होंने अपने इस किरदार को बखूबी पर्दे पर उतारा है। जबकि मुन्ना भईया अब भी वैसा ही तहलका मचाते दिख रहे हैं। हालांकि, इस बार वह थोड़े भावुक भी नजर आए।
वहीं, पंकज त्रिपाठी का बाहुबली वाला अंदाज काफी कम दिखा।
फीके किरदार
बेहद फीके लगे नए कलाकार
इस सीजन में शरद शुक्ला के किरदार से काफी उम्मीदें थीं। जबकि उनके दूसरे सीजन की रिलीज के बाद उनके किरदार ने काफी निराश किया है। हालांकि, उन्हें जितना काम दिया गया उसे उन्होंने बखूबी पर्दे पर निभाया है।
दूसरी ओर, लिलीपुट के किरदार में ज्यादा कुछ खास नहीं दिखा।
इनके अलावा डिम्पी (हर्षिता गौर) के जरिए प्रियांशु पेन्युली (रॉबिन) की एंट्री हुई है। जिसकी कहानी शायद तीसरे सीजन के लिए बीच में ही छोड़ दी गई है।
निर्देशन
निर्देशन में नहीं दिखा नयापन
'मिर्जापुर' सीरीज के निर्देशन की बात की जाए तो इसमें ज्यादा कमी नहीं निकाली जा सकती, लेकिन डायरेक्टर्स ने जिस नएपन के साथ पहले सीजन को रिलीज किया था, वो अब दूसरे सीजन में नजर नहीं आया।
इस सीजन में वह पहले वाला डर कहीं नजर ही नहीं आया। 'मिर्जापुर 2' का एक डायलॉग है, "आदमी का डरना जरूरी है, मरना नहीं।" जबकि इस बार लोग सिर्फ मर रहे हैं, उनमें इसका डर कहीं गायब हो चुका है।
कमजोर कड़ियां
कई जगहों पर किया निराश
'मिर्जापुर 2' के सभी एपिसोड्स लगभग एक घंटे हैं, जो कई जगहों पर बहुत खीचे और बोरिंग लगने लगते हैं।
इस सीजन की सबसे कमजोर कड़ी इसके नए पुरुष किरदार हैं, जो किसी भी तरह से प्रभावित नहीं कर पा रहे।
किसी भी मेल एक्टर ने इस कहानी को मजबूत बनाने या दर्शकों की पकड़ बनाए रखने में खास योगदान नहीं दिया। हालांकि, खून-खराबा और गाली-गलौज में कोई कमी नहीं की गई है।
समीक्षा
देखें या ना देखें?
अगर 'मिर्जापुर 2' की तुलना इसके पहले सीजन से की जाए तो यह काफी हद तक कमजोर लगती है।
जिन लोगों ने इसका पहला सीजन देखा है वह शायद इसका दूसरा सीजन भी जरूर ही देखेंगे। हालांकि, आप बिना किसी अपेक्षा के इसे देखें तो ही आप इसका आनंद ले पाएंगे।
जबकि मिर्जापुर के नए दर्शकों को यह कहानी पसंद आ सकती है।
हम 'मिर्जापुर 2' को पांच में से दो स्टार दे रहे हैं।