फांसी की सजा पर आधारित फिल्म 'लक्ष्मीकांतन कोलाई वझक्कु' आपको सोचने पर करेगी मजबूर
'लक्ष्मीकांतन कोलाई वादकुरु' 1972 की पृष्ठभूमि पर बनी एक तमिल ड्रामा फिल्म है। यह फिल्म एक डेथ रो कैदी अरिवुमती के आखिरी घंटों की कहानी बयां करती है।
फिल्म की कहानी मुख्य रूप से जेलर शिवानंद के साथ अरिवुमती की गहरी बातचीत के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें न्याय और मौत की सजा जैसे मुद्दों पर बहस होती है। फ्लैशबैक से पता चलता है कि कैसे गरीबी और मुश्किल फैसलों ने अरिवुमती को इस राह पर धकेला।
कहानी में एक ऐसा मोड़ भी आता है, जो जज को इस मामले से जोड़ देता है।
रंगराजन पांडेय का काम सबसे खास, वेत्री ने ठीक-ठाक अभिनय किया
रंगराजन शांत और विचारशील जेलर के तौर पर अपनी पहचान बनाते हैं, जबकि वेत्री ने अरिवुमती के किरदार को अच्छी तरह निभाया है।
कुछ फ्लैशबैक दृश्य थोड़े पुराने और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए लगते हैं। लगभग 2 घंटे की इस फिल्म में अपराध और सजा से जुड़े गहरे सवालों को उठाया गया है, मगर कभी-कभी यह भावनात्मक रूप से अधूरी सी लगती है।
अगर आपको सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्में पसंद हैं, भले ही वे हर तरह से अच्छी न हों, तो इसे एक बार देखा जा सकता है।