गौरी किशान का बड़ा बयान, मलयालम सिनेमा में पितृसत्ता पर जमकर बोलीं अभिनेत्री
अभिनेत्री गौरी किशान ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री में चल रहे लैंगिक भेदभाव पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि केरलम जैसी प्रगतिशील जगहों पर भी पितृसत्तात्मक सोच महिलाओं के अवसरों को सीमित कर रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि कैसे यह सोच पर्दे पर महिलाओं को दिखाए जाने और उनके किरदार गढने के तरीके को प्रभावित करती है, जिसका असर 'कई पीडियों की महिलाओं' पर देखा जा रहा है।
गौरी ने की पुरुषों से पूर्वाग्रहों को चुनौती देने की अपील
गौरी ने अपने निजी अनुभव साझा किए, जैसे उन्होंने कैमरे के पीछे बहुत कम महिलाओं को देखा और कई बार उनकी क्षमताओं को कम करके आंका गया।
उन्होंने सभी से, खासकर पुरुषों से, इन पूर्वाग्रहों को चुनौती देने और असल बदलाव लाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने फिल्मों में केवल आदर्श या बनी-बनाई छवि वाले नहीं, बल्कि और अधिक वास्तविक महिला किरदार दिखाने की मांग की।
उन्होंने साफ किया कि यह 'पुरुष बनाम महिला' की बहस नहीं है, बल्कि सभी के लिए समान अवसर मिलने और किसी महिला को सिर्फ उसके लिंग के आधार पर एक दायरे में न बांधने की बात है।