प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को घेरा- क्या 'कश्मीर फाइल्स', 'केरल स्टोरी' और 'धुरंधर' सब झूठ?
क्या है खबर?
केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कांग्रेस और वामपंथी दलों को 'झूठ का धुरंधर' करार दिया। उन्होंने 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरल स्टोरी' जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि ये दल सच्चाई को दबाने और समाज में भ्रम फैलाने के लिए लगातार झूठ का सहारा लेते हैं। आइए जानें क्या कुछ बोले प्रधानमंत्री।
बड़ा बयान
'धुरंधर' और 'द केरल स्टोरी' जैसी फिल्मों को बताया जागरूकता का जरिया
केरल के तिरुवल्ला में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक जागरूकता के निर्माण में सिनेमा की भूमिका पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने 'धुरंधर', 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरल स्टोरी' जैसी फिल्मों का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसी फिल्में न केवल समाज में महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाती हैं, बल्कि उन ऐतिहासिक पहलुओं और सच्चाइयों को भी मुख्यधारा की चर्चा का हिस्सा बनाती हैं, जिन्हें अक्सर दबा दिया जाता है।
ट्विटर पोस्ट
यहां देखिए वीडियो
PM #NarendraModi mentioned #Dhurandhar with #TheKeralaStory and #TheKashmirFiles pic.twitter.com/6pCzpEX4Zb
— $@M (@SAMTHEBESTEST_) April 5, 2026
पर्दाफाश
फिल्मों के बहाने मोदी ने LDF और UDF की खोली पोल
नरेंद्र मोदी ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने LDF (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) और UDF (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा फ्रंट) को निशाने पर लेते हुए कहा, "LDF और UDF झूठ बोलने में विशेषज्ञ हो गए हैं। ये दल हर उस फिल्म को झूठ करार देते हैं, जो समाज को आईना दिखाती है। 'द केरल स्टोरी' एक झूठ है, उन्होंने कहा कि 'द कश्मीर फाइल्स' एक झूठ है और उन्होंने ये भी कहा कि 'धुरंधर' एक झूठ है।"
चर्चा
फिल्में, सियासत और दो ध्रुवों में बंटा समाज
बता दें कि इन फिल्मों को लेकर समाज 2 हिस्सों में बंटा नजर आता है। जहां एक पक्ष इन्हें सच्चाई मानता है, वहीं दूसरा पक्ष इन्हें 'प्रोपेगेंडा' बताकर इनकी कड़ी आलोचना करता है। इसी मतभेद ने दर्शकों और विशेषज्ञों के बीच एक तीखी बहस को जन्म दिया है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी इन फिल्मों के जरिए समाज को जागरूक करने और सच्ची कहानियां दिखाने की सराहना करते हैं, तो दूसरी तरफ आलोचक इन्हें राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित मानते हैं।