एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की फटकार- मशहूर हस्ती होने का मतलब बेजुबानों का शोषण नहीं
क्या है खबर?
सांपों के जहर के मामले में फंसे मशहूर यूट्यूबर एल्विश यादव पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि अगर सितारों को बेजुबान जानवरों के साथ क्रूरता करने की छूट दी गई तो इससे समाज में बहुत गलत संदेश जाएगा। अदालत का मानना है कि मशहूर होने का मतलब यह नहीं है कि कोई भी कानून से ऊपर हो जाए, खासकर उन मामलों में जहां पीड़ित बेजुबान हों।
सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट अब खुद खंगालेगा पुलिस के सबूत
सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक मशहूर व्यक्ति द्वारा प्रचार के लिए बेजुबान सांपों का इस्तेमाल करना समाज में बुरा संदेश देता है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल एल्विश के खिलाफ चल रहे ट्रायल पर रोक बरकरार रखी है, लेकिन ये साफ किया कि मामले की गहराई से जांच होगी कि क्या वो इसमें शामिल थे। कोर्ट अब पुलिस के सबूतों की जांच करेगा कि क्या वो उन्हें दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त हैं।
टिप्पणी
कोर्ट की सीधी टिप्पणी
कोर्ट ने एल्विश से कहा कि वो दो बातों पर विचार करेगा- पहली, इस मामले में उनकी भूमिका क्या है और क्या उन्हें फंसाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। साथ ही देखा जाएगा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत क्या कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मामला खत्म किया जा सकता था, लेकिन अगर एक लोकप्रिय व्यक्ति को बेजुबान सांप का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई तो लोग समझेंगे कि 'बड़ा आदमी' होकर कानून तोड़ा जा सकता है।
रोक
पिछले साल लगी थी निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक
पिछले साल 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। ये मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने एक यूट्यूब वीडियो के लिए सांपों और उनके जहर का गलत इस्तेमाल किया था। साथ ही पर ऐसी रेव पार्टियां आयोजित करने में शामिल होने का भी आरोप था, जहां कथित तौर पर विदेशी लोग सांप का जहर और अन्य नशीले पदार्थ सप्लाई करते थे।
दलील
एल्विश की ओर से दी गईं ये दलीलें
एल्विश की वकील ने कोर्ट में कहा, "जो चीज बरामद हुई, वो सांप का जहर नहीं बल्कि एंटीबॉडी थी। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट कहती है कि इसमें 4 सामान्य सांपों (कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ स्केल्ड वाइपर) के 'जहर की एंटीबॉडी' के सकारात्मक परिणाम मिले हैं, ना कि खुद जहर के।"दलील दी गई कि जिस वीडियो को लेकर विवाद है, उसमें इस्तेमाल किए गए सांपों के दांत नहीं थे और ना ही उनमें जहर की ग्रंथियां थीं।
बहस
बचाव पक्ष और सरकारी वकील के बीच तीखी बहस
एल्विश की वकील ने तर्क दिया कि 'सांप के जहर की एंटीबॉडी' NDPS एक्ट की सूची में शामिल ही नहीं है। उन्होंने कहा, "पुलिस खुद से कोई ऐसा अपराध पैदा नहीं कर सकती, जो कानून की किताब में मौजूद ही न हो। उधर, सरकारी वकील ने कहा कि NDPS कानून की सूची समय के साथ बदलती रहती है। अगर कोई चीज आज सूची में नहीं है तो इसका मतलब ये नहीं कि वो नशा या खतरनाक नहीं है।