अब 3 घंटे से ज्यादा की फिल्में सिनेमाघरों में क्यों बन रहीं 'पैसा वसूल' मनोरंजन?
भारतीय सिनेमाघरों में अब 3 घंटे से ज्यादा अवधि वाली बड़ी फिल्में फिर से वापसी कर रही हैं। 'धुरंधर' 1 और 2, 'पुष्पा 2: द रूल', 'कल्कि 2898 AD' और 'RRR' जैसी फिल्में इसका बड़ा उदाहरण हैं।
दरअसल, दर्शकों को ये लंबी और महागाथाएं खूब पसंद आ रही हैं। शायद इसकी वजह यह है कि OTT प्लेटफॉर्म्स पर घंटों तक देखने की आदत ने उन्हें लंबी फिल्मों के लिए मानसिक रूप से तैयार कर दिया है।
यही वजह है कि अब सिनेमा में 3 घंटे की फिल्म देखना सिर्फ एक बड़ा अनुभव ही नहीं, बल्कि पैसे वसूल सौदा भी लगता है।
रनटाइम के फायदे और नुकसान पर भुवनेश, आशीष और राहुल की राय
मिराज एंटरटेनमेंट के भुवनेश मेंदीरत्ता बताते हैं कि लंबी फिल्में निर्देशक और निर्मातों को बड़े पर्दे पर गहरे किरदार गढ़ने और भव्य कहानियां कहने का भरपूर मौका देती हैं।
हालांकि, इसकी अपनी एक चुनौती भी है। इसकी वजह से सिनेमाघरों में दिनभर में कम शो ही दिखाए जा पाते हैं।
वहीं, सिनेपोलिस इंडिया के आशीष मिश्रा बताते हैं कि जब ये लंबी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट हो जाती हैं, तो सिर्फ सिनेमा हॉल की सीटें ही नहीं भरतीं, बल्कि स्नैक्स काउंटर पर भी खूब बिक्री होती है।
मुक्ता आर्ट्स के राहुल पुरी का मानना है कि दर्शकों को लगातार 3 घंटे तक अपने फोन से दूर रख पाना सबसे बड़ी चुनौती है।