राजपाल यादव पर केस करने वाला बोला- बच्चों की तरह गिड़गिड़ाया, फिर भी नहीं मिले पैसे
क्या है खबर?
अभिनेता राजपाल यादव जेल से बाहर आ गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस के कई मामलों में उनकी अस्थायी रिहाई को मंजूरी दे दी है। उन्हें कर्ज न चुकाने और गलत हलफनामा देने के आरोप में जेल की सजा सुनाई गई थी। राजपाल की रिहाई के बीच उनके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे बिजनेसमैन ने बताया कि आखिर क्या थी वो मजबूरी, जिसने उन्हें बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन को जेल की दहलीज तक खींचने पर मजबूर कर दिया।
खुलासा
"मैं उनके सामने गिड़गिड़या पर उन पर कोई असर नहीं हुआ"
माधव गोपाल अग्रवाल ने न्यूज पिंच को बताया कि पैसा उधार देने के बाद वो कई बार राजपाल से अपना हक मांगने गए, लेकिन उन्हें सिर्फ खाली हाथ लौटना पड़ा। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, "मैंने उनसे अनगिनत बार अपने पैसे वापस करने की गुहार लगाई। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई थी कि मैं उनके सामने एक छोटे बच्चे की तरह रोया ताकि वे मेरी मजबूरी समझ सकें, लेकिन मेरी आंसुओं का उन पर कोई असर नहीं हुआ।"
विवाद
बिजनेसमैन ने दिया 14 साल पुराने विवाद का पूरा ब्यौरा
बिजनेसमैन गोपाल अग्रवाल ने बताया कि राजपाल के साथ उनका रिश्ता महज एक कारोबारी लेनदेन नहीं, बल्कि 14 साल पुराना जुड़ाव था। बिजनेसमैन गोपाल अग्रवाल ने खुलासा किया कि राजपाल यादव के साथ उनका परिचय एक साझा मित्र, पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार के जरिए हुआ था। उन्होंने बताया कि राजपाल उस समय अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'अता पता लापता' पर काम कर रहे थे। फिल्म लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन आखिरी दौर में फंड की भारी कमी आ गई।
मामला
राजपाल की पत्नी ने संभाला मोर्चा तो पिघला बिजनेसमैन का दिल
राजपाल ने अग्रवाल से संपर्क कर बताया कि उनकी फिल्म निर्माण के अंतिम चरण में है, लेकिन फंड खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा था कि अगर अभी पैसे का इंतजाम नहीं हुआ तो उनका सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। बिजनेसमैन के मुताबिक वो शुरुआत में राजपाल को इतनी बड़ी रकम देने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे, लेकिन इस सौदे में एक भावनात्मक मोड़ तब आया, जब राजपाल की पत्नी राधा यादव ने इस मामले में दखल दिया।
समझौता
ऑफिस में हुआ था समझौता, पत्नी बनी थीं गारंटर
अग्रवाल के कहा कि ये समझौता उनके दिल्ली स्थित कार्यालय में हुआ था। इसमें राजपाल के साथ-साथ उनकी पत्नी ने भी पर्सनल गारंटी दी थी। इसका मतलब था कि अगर राजपाल पैसे नहीं लौटा पाते तो उनकी पत्नी कानूनी रूप से उस कर्ज को चुकाने के लिए जिम्मेदार होतीं। राजपाल पर भरोसा करते हुए बिजनेसमैन ने फिल्म की रिलीज पर लगी अदालती रोक भी हटवा दी थी, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट गई और पैसे की वापसी रुक गई।
केस
बाउंस चेक के चलते 14 साल चला केस
2013 तक कोई समाधान न निकलने पर अग्रवाल ने दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट की दखल के बाद समझौते की राशि बढ़कर ₹10.40 करोड़ तय हुई। बिजनेसमैन का दावा है कि राजपाल ने भुगतान के लिए कई चेक दिए, लेकिन वे सभी बाउंस हो गए। अग्रवाल ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने पैसे के लिए अभिनेता के सामने "बच्चों की तरह" गुहार लगाई थी, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ 14 साल की लंबी कानूनी लड़ाई मिली।