बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बालचित्रवाणी कर्मचारियों को नहीं मिलेगी पेंशन; जानें वजह
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बालचित्रवाणी के 2 पूर्व कर्मचारियों, रवींद्र बिदकर और रामदास शेनगे की पेंशन की मांग खारिज कर दी है।
अदालत ने साफ किया कि वे सरकारी कर्मचारी नहीं थे, इसलिए पेंशन के हकदार नहीं बन सकते। रवींद्र और रामदास ने SIET में काम किया था।
यह समूह केंद्र सरकार के फंड से शुरू हुआ था और बाद में एक स्वायत्त संस्था बन गया, लेकिन चूंकि इनके पास कोई सरकारी पद नहीं था और सरकारी सेवा के नियमों के मुताबिक ये रिटायर नहीं हुए, इसलिए अदालत ने इन्हें पेंशन के लिए अयोग्य पाया।
ई-बालभारती बालचित्रवाणी के मिशन को बढ़ा रहा है आगे
बालचित्रवाणी को दूरदर्शन पर शैक्षिक कार्यक्रम दिखाने के लिए 1984 में शुरू किया गया था, लेकिन पैसों की कमी और बदलती तकनीक के चलते 2017 में इसे बंद कर दिया गया।
अब इसका यह मकसद ई-बालभारती के जरिए जारी है। ई-बालभारती एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो शिक्षा को आधुनिक युग में ले जा रहा है।
कोर्ट का यह फैसला बताता है कि शिक्षा के डिजिटल होने के साथ-साथ पारंपरिक सरकारी नौकरियों का स्वरूप भी किस तरह बदल रहा है।