LOADING...
आशा भोसले का मशहूर ब्रिटिश बैंड के साथ वो आखिरी गाना, जिसे दुनिया कभी नहीं भूलेगी

आशा भोसले का मशहूर ब्रिटिश बैंड के साथ वो आखिरी गाना, जिसे दुनिया कभी नहीं भूलेगी

Apr 12, 2026
03:47 pm

क्या है खबर?

आशा भोसले की सुरीली विरासत केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं थी। उनके वैश्विक सफर का सबसे अनूठा अध्याय मशहूर ब्रिटिश बैंड 'गोरिल्लाज' संग उनका सहयोग रहा, जिसके जरिए नई पीढ़ी को उनके चर्चित गाने 'द शैडोई लाइट' की सौगात मिली। ये गाना साबित करता है कि आशा की आवाज हर दौर और हर शैली के लिए कालजयी थी। अब उनके जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर ये आखिरी जुगलबंदी दुनियाभर के प्रशंसकों के लिए एक अनमोल धरोहर बन गई है।

आखिरी गाना

संगीत के 'पर्वत' पर आखिरी सुर

12 अप्रैल, 2026 को 92 की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहने से पहले आशा भोसले ने संगीत जगत को एक शानदार अंतिम सौगात दी। ये उनके सफर का एक शांत और दिव्य पड़ाव था। 27 फरवरी, 2026 को रिलीज हुए ब्रिटिश बैंड गोरिल्लज के एल्बम 'द माउंटेन' में उन्होंने 'द शेडो लाइट' गाने को अपनी आवाज दी। दुनिया के 2 छोरों के इस मिलन ने एक वैश्विक जुगलबंदी को जन्म दिया और उनकी आवाज नई पीढ़ी तक पहुंची।

नया अंदाज

पुरानी यादों से नहीं, नए अंदाज से जीता युवाओं का दिल

पश्चिमी देशों के उन तमाम युवा प्रशंसकों के लिए, जो बॉलीवुड से हटकर भारतीय संगीत को तलाश रहे थे, ये गाना आशा की जादुई दुनिया से उनकी पहली मुलाकात थी। खास बात ये रही कि उनकी यह पहचान पुरानी यादों के सहारे नहीं, बल्कि खुद को नए रूप में ढालने के जरिए बनी। उन्होंने खुद को समय के साथ इस कदर बदला कि आज की पीढ़ी को भी उनकी आवाज उतनी ही आधुनिक और प्रभावी लगी, जितनी दशकों पहले थी।

Advertisement

संगीत

मुंबई, दिल्ली और राजस्थान में रिकॉर्ड हुआ आशा भोसले का आखिरी गाना

ब्रिटिश बैंड गोरिल्लाज हमेशा से ही अलग-अलग संस्कृतियों और दिग्गजों को एक साथ लाने के लिए मशहूर रहा। अपने नौवें एल्बम 'द माउंटेन' के साथ इस वैश्विक बैंड का ध्यान भारत की ओर मुड़ा। इस एल्बम की रिकॉर्डिंग किसी एक शहर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें मुंबई, दिल्ली, राजस्थान और वाराणसी की संगीत विरासत को पिरोया गया। भारत की इन्हीं अलग-अलग मिट्टी की खुशबू और सुरों के बीच आशा की आवाज इस प्रोजेक्ट का सबसे चमकता हुआ हिस्सा बनी।

Advertisement