'देव डी' की सिनेमाघरों में वापसी, अनुराग कश्यप बोले- ये मेरे गुस्से और विद्रोह की उपज
क्या है खबर?
अनुराग कश्यप की बेहतरीन फिल्मों में शुमार 'देव डी' एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट रही है। इस री-रिलीज के मौके पर निर्देशक अनुराग ने फिल्म से जुड़ी पुरानी यादें ताजा की हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया कि 'देव डी' महज एक कहानी नहीं, बल्कि उस दौर में उनके भीतर चल रहे गुस्से और सिस्टम के खिलाफ 'विद्रोह' का नतीजा थी। आइए जानें फिल्म दोबारा किस दिन सिनेमाघरों का रुख करेगी।
री-रिलीज
24 अप्रैल को चुनिंदा सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज होगी फिल्म
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' (2012) से पहले 'देव डी' (2009) ही वो फिल्म थी, जिसने अनुराग को बॉलीवुड में एक ताकतवर फिल्ममेकर के रूप में स्थापित किया था। एक कल्ट क्लासिक का दर्जा प्राप्त कर चुकी ये फिल्म अपनी रिलीज के 17 साल बाद अब 24 अप्रैल को दोबारा सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। अभय देओल, कल्कि कोचलिन और माही गिल अभिनीत ये फिल्म केवल कुछ चुनिंदा सिनेमाघरों में ही रिलीज होगी।
मकसद
'देव डी' के पीछे का विद्रोह
टाइम्स ऑफ इंडिया को अनुराग ने बताया, "जब मैंने 'देव डी' बनाई तो ये मेरे भीतर के 'विद्रोह' से उपजी थी।" वो 'देवदास' के पुराने रूमानी संस्करण को तोड़ना चाहते थे। उनका उद्देश्य 'देवदास' की स्त्री-द्वेषी सोच को चुनौती देना था। उन्होंने पारो और चंदा के किरदारों को मौजूदा दौर के हिसाब से गढ़ा, जहां पारो के पास अपनी इच्छा और गुस्सा है, और चंदा त्याग की मूर्ति नहीं, बल्कि खुद को फिर से गढ़ने वाली एक मजबूत महिला है।
अंत
"मैं दर्शकों को सुकून नहीं, बेचैनी देना चाहता था"
अनुराग ने बताया कि वो एक ऐसी कहानी को, जो दुखद रोमांस में डूबी थी, आज के अराजक भारत की वास्तविकता में लाना चाहते थे। फिल्म के अंत को लेकर उन्होंने कहा कि वो इसे कोई सुखंद अंत नहीं देना चाहते थे, बल्कि दर्शकों को असहज करना चाहते थे, ताकि वे माफी और जवाबदेही के बारे में सोचें। अनुराग के अनुसार, अंत में देव कोई बहुत अच्छा इंसान नहीं बनता, बस उसे जीवन की नाजुकता का एहसास होता है।
उत्साह
फिल्म के दोबारा पर्दे पर आने से उत्साहित हैं अनुराग
फिल्म की री-रिलीज पर अनुराग उत्सुक हैं कि नई पीढ़ी फिल्म और इसके संगीत पर कैसी प्रतिक्रिया देती है। 'देव डी' शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध बंगाली उपन्यास 'देवदास' का आधुनिक रूपांतरण था। इस फिल्म में अभय देओल ने 'देव', माही गिल ने 'पारो' और कल्कि ने 'चंदा' का किरदार निभाया। कल्कि ने इसी फिल्म से बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की थी। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्म के गाने 'इमोशनल अत्याचार' में बैंड गायक के रूप में मनोरंजक कैमियो किया था।