अनुपम खेर ने बताई स्टारडम की सच्चाई, बोले- शीशमहल में रहोगे तो अकेलापन डराएगा
क्या है खबर?
दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर का कहना है कि वो खुद पर स्टारडम का बोझ नहीं लादते, क्योंकि ऐसा करने से अकेलापन और डरावना हो जाता है। 71 वर्षीय अभिनेता ने कुछ वर्षों के अंतराल के बाद 'जाने पहचाने अनजाने' नाटक से थिएटर में वापसी की है। ये नाटक अकेलेपन, मानवीय संबंधों और जीवन के ताने-बाने को गहराई से तलाशता है। अनुपम का मानना है कि आम जिंदगी जीना ही अकेलेपन से बचने का सबसे सच्चा तरीका है।
बयान
"स्टारडम का बोझ उठाओगे तो अकेलापन खौफनाक हो जाएगा"
अनुपम का अमेरिका और कनाडा का 45 दिवसीय दौरा बेहद सफल रहा, जहां उनके नाटक को दर्शकों ने खूब सराहा।
अपनी यात्रा के दौरान निर्देशक गजेंद्र अहीरे संग बातचीत में उन्होंने कहा कि वो खुद पर 'अनुपम खेर' के स्टारडम का बोझ नहीं लादते।
उनका मानना है कि अगर वो आम लोगों के बीच बसों में सफर न करें या दुकानों और सुशी बार में न बैठें तो एक स्टार के तौर पर उनका अकेलापन खौफनाक हो जाएगा।
तंज
"मुस्कान और गले मिलना अब इमोजी बन चुके हैं"
गजेंद्र अहिरे द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक 'जाने पहचाने अनजानें' से स्वरूप संपत ने लगभग 2 दशक बाद रंगमंच पर वापसी की है।
अमेरिका में 'स्टार प्रमोशन इंक' द्वारा प्रस्तुत इस नाटक के दौरान अनुपम ने आज के दौर पर गहरा तंज कसा।
उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया ने मानवीय स्पर्श छीन लिया है और अब लोगों की असली मुस्कान व गले मिलना सिर्फ इमोजी तक सीमित होकर रह गया है।
सामान्य जिंदगी
बेहद सामान्य जिंदगी जीते हैं अनुपम
540 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता अनुपम का मानना है कि अलग-थलग या काल्पनिक दुनिया में रहने से अकेलापन खौफनाक लगने लगता है, लेकिन वो खुद बेहद सामान्य जिंदगी जीते हैं।
उन्होंने कहा कि विदेश में रहने वाले लोग भारत से भावनात्मक रूप से गहराई से जुड़े हैं। ऐसे में जब वे किसी लोकप्रिय अभिनेता को मंच पर प्रस्तुति देते देखते हैं तो वे कहानी और कलाकार दोनों के बेहद करीब महसूस करने लगते हैं।