इरफान खान को याद कर भावुक हुए अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा, बोले- पता नहीं किसकी नजर लगी
क्या है खबर?
कुछ लोग कैमरे के सामने नहीं, दिल के सामने एक्टिंग करते हैं... इरफान खान उन्हीं में से एक थे। उनकी जयंती पर उनके साथी कलाकार अखिलेंद्र मिश्रा ने उनसे जुड़ी यादें साझा की हैं, जो आज भी हमें उनकी कमी का एहसास कराती हैं। इरफान अभिनय की पूरी पाठशाला थे। अखिलेंद्र ने इरफान की जिंदगी, उनकी सोच और उनके काम को लेकर ऐसी बातें कहीं हैं, जो बताती हैं कि क्यों आज भी हर कलाकार इरफान से सीखता है।
पहचान
"मेहनत और काबिलियत की सबसे बड़ी मिसाल थे इरफान"
अमर उजाला से अखिलेंद्र ने कहा कि इरफान रंगमंच से निकले एक बेहतरीन कलाकार थे, जिन्होंने बिना किसी सिफारिश या नेपोटिज्म के अपने दम पर दुनियाभर में पहचान बनाई। वो अपने करियर के सबसे अच्छे दौर में थे और लगातार शानदार काम कर रहे थे। इरफान आज भी मेहनत और काबिलियत से आगे बढ़ने वाले कलाकारों की सबसे बड़ी मिसाल माने जाते हैं। वो बोले, "पता नहीं किसकी नजर लग गई कि वो इतनी जल्दी हम सबको छोड़कर चले गए।"
संघर्ष
टीवी से फिल्मों तक, इरफान खान का तयशुदा सफर
अखिलेंद्र, इरफान को उनके शुरुआती टेलीविजन दौर से जानते थे। 'चंद्रकांता' के समय, 1994-95 के आसपास दोनों ने साथ काम किया था। अभिनेता बोले, "उस वक्त इरफान लगातार टीवी कर रहे थे। लंबे-लंबे घंटे शूटिंग होती थी। वो कहते थे कि उन्हें पहले अपना घर खरीदना है और घर हो जाने के बाद ही वो पूरी तरह फिल्मों पर ध्यान देंगे। बाद में बिल्कुल वैसा ही हुआ। घर लेने के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में पूरे मन से कदम रखा।"
असर
"आज की पीढ़ी के अभिनेताओं पर दिखता है इरफान का असर"
अखिलेंद्र बोले, "आज की पीढ़ी के कई अभिनेता इरफान की नकल करने की कोशिश करते हैं। उनका धीमे बोलना, उनका ठहराव, उनका सहज अंदाज, ये सब कहीं न कहीं इरफान से ही आया है, लेकिन फर्क ये है कि इरफान कभी किसी की नकल नहीं थे। वे जो भी करते थे, उनके भीतर से आता था। उनकी अदायगी में सच्चाई थी। मेरा मानना है कि इरफान जैसा बनने का मतलब उनकी नकल करना नहीं, बल्कि अपनी सच्चाई को ढूंढना है।'
यादें
बड़ी जल्दी चले गए इरफान- अखिलेंद्र
अखिलेंद्र ने इरफान की आदतों और स्वभाव को याद कर कहा कि वह हर किसी से मुस्कुराकर मिलते थे। सम्मान देना उनकी फितरत में था। बड़ों के सामने खड़े होकर बात करना और साथ काम करने वालों को बराबरी का दर्जा देना उनके व्यवहार की खास पहचान थी। अखिलेंद्र बोले कि इरफान बहुत जल्दी चले गए। उनका सफर अधूरा रह गया और यही बात सबसे ज्यादा खलती है। वो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन सकते थे।
जानकारी
साल 2020 में अलविदा कह गए थे इरफान
मार्च 2018 में इरफान को एक दुर्लभ बीमारी न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के बारे में पता चला था। इसके इलाज के लिए उन्होंने भारत के बाहर भी इलाज कराया, लेकिन वो ठीक नहीं हो पाए। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अप्रैल, 2020 में उनका निधन हो गया।