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अजय देवगन ने बताया हिंदी फिल्मों का गणित, बोले- हर 80 किलोमीटर पर बदलते हैं दर्शक
अजय देवगन बोले-हिंदी फिल्में बनाना सबसे मुश्किल

अजय देवगन ने बताया हिंदी फिल्मों का गणित, बोले- हर 80 किलोमीटर पर बदलते हैं दर्शक

Oct 01, 2026
06:33 pm

क्या है खबर?

अभिनेता अजय देवगन पिछले तीन दशकों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा हैं। 90 के दशक के सिंगल-स्क्रीन दौर से लेकर मल्टीप्लेक्स और अब OTT के जमाने तक, उन्होंने दर्शकों के बदलते मिजाज को बेहद करीब से देखा है। उनके मुताबिक, मौजूदा दौर में सिनेमा का दायरा थिएटर, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया में बंट चुका है। लिहाजा ये तय कर पाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है कि आखिर हिंदी फिल्म किस दर्शक वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई जाए।

बयान

अन्य भाषाओं से अलग है हिंदी सिनेमा का गणित- अजय

फिक्की फ्रेम्स के एक कार्यक्रम के दौरान अजय ने अन्य भाषाओं की तुलना में हिंदी फिल्में बनाने में आने वाली चुनौतियों पर बात की।

उन्होंने कहा, "मैं किसी अन्य सिनेमा का श्रेय कम नहीं कर रहा हूं। चाहे वो पारंपरिक सिनेमा हो या अंतरराष्ट्रीय, वहां भी फिल्में बनाना उतना ही कठिन है, लेकिन मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि हिंदी फिल्म बनाना सबसे ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि आप ये नहीं जानते कि आपकी टारगेट ऑडियंस कौन है।"

चुनौती

"अलग-अलग सोच और पसंद को एक साथ साधना ही सबसे बड़ी चुनौती"

अजय का मानना है कि क्षेत्रीय भाषा में फिल्म बनाना आसान नहीं होता, बल्कि असली चुनौती हिंदी दर्शकों की विविधता है।

वो बोले, "पंजाबी, तेलुगू या तमिल फिल्मों का एक निश्चित क्षेत्र होता है, जहां लोगों की पसंद साफ होती है और उन्हें टारगेट करना आसान रहता है, लेकिन हिंदी सिनेमा पूरे देश में देखा जाता है। यहां हर वर्ग की सोच और पसंद अलग है, इसलिए सबको पसंद आने वाली एक फिल्म बनाना सबसे मुश्किल काम है।"

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कारोबार

हिंदी फिल्मों की घटती कमाई पर कही ये बात

अजय बोले, "हिंदी फिल्म को बड़ी कमाई करनी होती है, लेकिन यहां हर 80-90 किलाेमीटर पर बोली और लोगों की सोच बदल जाती है। फिर छोटे शहरों और बड़े शहरों के लोगों की पसंद भी अलग-अलग होती है। असली दिक्कत यही है कि हिंदी फिल्मों के लिए कोई तय दर्शक नहीं, इसलिए फिल्म एक तरह के लोगों को पसंद आती है तो दूसरों को नहीं, जिससे अच्छी कमाई नहीं हो पाती। बाकी भाषाओं की फिल्मों में ये समस्या नहीं होती।"

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आगामी फिल्म

'दृश्यम 3' लेकर आ रहे अजय

अजय बोले, "दर्शकों के बदलाव के साथ हमें भी बदलना होगा। 90 के दशक में जब मल्टीप्लेक्स नहीं थे, तब टारगेट ऑडियंस तय करना आसान था, लेकिन अब सिंगल स्क्रीन, मल्टीप्लेक्स और प्रीमियम थिएटर्स के दर्शकों की पसंद अलग-अलग है। अब हर वर्ग को एक साथ साधने के लिए बहुत ज्यादा सोच-विचार और मेहनत की जरूरत पड़ती है।"

बता दें कि अजय फिल्म 'दृश्यम 3' के प्रचार में व्यस्त हैं, जो 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

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