नानी का 'द पैराडाइज' पर बेबाक जवाब, बोले- 'हिंसा सिर्फ चौंकाने के लिए नहीं, हाशिए का सच है'
नानी अपनी नई फिल्म 'द पैराडाइज' में दिखाए गए जबरदस्त एक्शन का बचाव कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कहानी के 1980 के दशक के सिकंदराबाद के कठोर माहौल के बिल्कुल सच है।
हाल ही में एक प्रेस कार्यक्रम में, उन्होंने बताया कि फिल्म में हिंसा सिर्फ चौंकाने के लिए नहीं है। इसका मकसद हाशिए पर रह रहे समुदायों के असल संघर्षों को दिखाना है।
यह फिल्म 24 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और इसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से 'A' सर्टिफिकेट मिला है।
ओडेला की फिल्म 'जदल' के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष की कहानी
श्रीकांत ओडेला ने इस फिल्म का निर्देशन किया है (जिन्होंने नानी के साथ 'दसरा' में काम किया था)। 'द पैरााइज' में नानी ने जदल नाम के किरदार का निभाया है, जो सामाजिक भेदभाव और व्यवस्थागत उत्पीड़न से लड़ता है।
फिल्म में मोहन बाबू, कयादु लोहार, सोनाली कुलकर्णी और राघव जुयाल जैसे कलाकार भी हैं। नानी चाहते हैं कि दर्शक फिल्म की भावनात्मक गहराई से जुड़ें।
उन्होंने बताया कि कहानी के लिए हिंसा बहुत जरूरी थी और इस बात पर जोर दिया कि इसका उद्देश्य सिर्फ एक्शन दिखाना नहीं है।