CBSE का नया नियम: 2026 से छात्रों को पढ़नी होंगी दो भारतीय भाषाएँ, विदेशी भाषाओं का क्या?
छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से CBSE के कई स्कूलों में फ्रेंच या जर्मन जैसी विदेशी भाषाएँ अब तीसरी भाषा के विकल्प के तौर पर उपलब्ध नहीं होंगी। इसकी बजाय, छात्रों को दो भारतीय भाषाओं को चुनना ज़रूरी होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का मकसद स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देना है और यह फैसला इसी का हिस्सा है। अब छठी से 10वीं कक्षा तक छात्रों को तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएँ पढ़ना अनिवार्य होगा।
अंग्रेजी माध्यम के स्कूल अब भारतीय भाषाओं पर देंगे जोर
दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों के अंग्रेजी माध्यम के स्कूल इस बदलाव के लिए तैयारी में जुट गए हैं। कुछ स्कूल हिंदी, संस्कृत या क्षेत्रीय भाषाओं को नए विकल्प के रूप में शामिल कर रहे हैं। वहीं, कुछ स्कूलों ने विदेशी भाषाओं को केवल अतिरिक्त कौशल कक्षाओं तक सीमित रखने की योजना बनाई है, उन्हें मुख्य विषय के तौर पर नहीं पढ़ाया जाएगा। इस बदलाव का मतलब यह भी है कि कुछ भाषा शिक्षकों को स्कूल में क्लब चलाने या दूसरे विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। अगर आप अभी छठी कक्षा में पढ़ रहे हैं, तो यह नई नीति आपकी 2030-31 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं तक लागू रहेगी।