सेवानिवृत्ति के बाद समय से पहले खत्म नहीं होगा आपका पैसा, ये तरीके अपनाएं
क्या है खबर?
सेवानिवृत्ति के बाद आपको वेतन बंद होने के बाद खर्चों की चिंता सताने लगती है। कई लोग इसके लिए अच्छी-खासी रकम भी जमा कर लेते हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें इसके जल्दी खत्म होने की आशंका रहती है। आप 25 वर्ष के लिए पैसा जोड़ते हैं, लेकिन हर चीत की कीमत बढ़ने के कारण यह 18 साल में ही खत्म हो सकता है। आइये जानते हैं ऐसा क्या करें, जिससे पैसों की परेशानी दूर कर सकते हैं।
खर्चे
महंगाई को देखते हुए लगाएं खर्चों का हिसाब
सबसे पहले आप सिर्फ एक बड़ी रकम के बारे में सोचना बंद करें। इसके बजाय, अपने मासिक खर्च के बारे में सोचें। आराम से जीने के लिए आपको वास्तव में कितने पैसों की ज़रूरत है? किराने का सामान, बिजली, रखरखाव, दवाइयां और कभी-कभार बाहर खाना खाने के लिए के खर्चे का हिसाब लगाएं। ध्यान रखें कि महंगाई बढ़ती रहती हैं, जो आज आपको वहन करने योग्य लगती है, लेकिन 10 साल बाद सभी चीजों की कीमत बढ़ जाएगी।
निकासी
जमा पूंजी से पैसे निकालने पर दें ध्यान
वेतन मिलना शुरू होने और बचत बढ़ने पर कई लोग खर्च में ढील देने लगते हैं, लेकिन आपको हर साल निकाली जाने वाली रकम पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर, आप बाजार में मंदी के दौरान बहुत ज्यादा पैसा निकाल लेते हैं तो हो सकता है कि आपका पैसा दोबारा न बढ़े। हर साल कुल जमा राशि का लगभग 3 से 4 प्रतिशत निकालना चाहिए। इससे आपका पैसा लंबे समय तक चलता है।
निवेश
कहां करना चाहिए निवेश?
बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए अपना पूरा पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में न लगाएं। इक्विटी म्यूचुअल फंड या अन्य वृद्धि निवेशों में कुछ हिस्सा रखने से आपका पैसा बढ़ती लागतों के साथ तालमेल बनाए रखने में मदद कर सकता है। आपको बड़े जोखिम उठाने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आपके पास अच्छा स्वास्थ्य बीमा हो और आपात स्थितियों के लिए अलग से धनराशि रखें, ताकि आपको निवेशों को खत्म न करना पड़े।
बचत
बचत को अलग-अलग रखें
आप अपनी बचत को अलग-अलग हिस्सों में बांट लें। 1-2 साल के खर्च के बराबर रकम सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध निवेश में रखें। कुछ सालों के खर्च के लिए स्थिर निवेश में पैसा लगाएं और बाकी को दीर्घकालिक वृद्धि के लिए निवेशित रहने दें। इससे बाजार में गिरावट आने पर आपको नुकसान में निवेश नहीं तोड़ना पड़ेगा। सेवानिवृत्ति की रकम रातों-रात खत्म नहीं होती, लेकिन खर्च ज्यादा हो या निवेश वृद्धि कम हो तो धीरे-धीरे कम होती जाती है।