वसीयत या गिफ्ट डीड: आवासीय मकान हस्तांतरित करने का क्या है अच्छा तरीका?
क्या है खबर?
आवासीय मकान को अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम करने के लिए गिफ्ट डीड और वसीयत का विकल्प होता है। दोनों कानूनी रूप से संपत्ति हस्तांतरित करने के साधन हैं। ऐसे में लोगों में इस बात को लेकर संशय होता है कि गिफ्ट डीड कराएं या वसीयत बनवाएं, जिससे न अतिरिक्त टैक्स लगे, न भारी फीस देनी पड़े और न ही झंझट वाला पेपरवर्क करना पड़े। आइये जानते हैं संपत्ति हस्तांतरित के दोनों विकल्पों में क्या अंतर है।
गिफ्ट डीड
गिफ्ट डीड एक महंगा विकल्प
गिफ्ट डीड एक स्थायी प्रक्रिया होती है। एक बार संपत्ति हस्तांतरित हो जाने के बाद मालिक उस पर अधिकार खो देता है। इसलिए, संपत्ति केवल उसी व्यक्ति को सौंपें, जिस पर आपको पूरा भरोसा हो। इसमें कई खर्च- स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज जुड़ जाते हैं। कई राज्यों में यह राशि काफी अधिक हो सकती है, जिससे यह तरीका महंगा साबित होता है। इसके अलावा, गिफ्ट डीड के रजिस्टर्ड होते ही संपत्ति तुरंत प्राप्तकर्ता के नाम हो जाएगी।
वसीयत
कभी भी बदल सकते हैं वसीयत
वसीयत एक कानूनी दस्तावेज है, जो यह सुनिश्चित करता है कि मृत्यु के बाद आपकी संपत्ति किसे और कैसे दी जाएगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि आप जीवनभर संपत्ति पर अधिकार बनाए रखते हैं। आप किसी भी समय बदल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में वसीयत को रजिस्टर्ड कराना सबसे आसान, सुरक्षित और कम खर्च वाला तरीका है। इस पर मामूली रजिस्ट्रेशन फीस लगती है और कोई स्टांप ड्यूटी या कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता।