क्या होम लोन की एक किस्त चूकना आपको बना देगा डिफॉल्टर? जानिए क्या कहते हैं नियम
क्या है खबर?
कभी ऐसा भी मौका आ जाता है, जब आप होम लोन की EMI भरने से चूक जाते हैं। इसके पीछे वेतन में देरी, बीमारी का बड़ा खर्चा, ऑटो-डेबिट फेल हो जाना या पैसों की तंगी जैसे कारण होते हैं। ऐसे में यह घबराहट शुरू हो जाती है कि क्या बैंक आपको डिफॉल्टर घोषित कर देगी या क्रेडिट स्कोर गिर जाएगा? आपके मन में भी ये सवाल उठ रहे हैं तो हम बताते हैं एक किस्त चूकने पर क्या असर पड़ेगा।
मैसेज
मैसेज के साथ होती है शुरुआत
EMI की तारीख गुजर जाने के बाद आपको ओवरड्यू का मैसेज मिलना शुरू हो जाता है। यह एक आंतरिक संकेत है, लेकिन अभी तक कोई कानूनी या क्रेडिट संबंधी कार्रवाई नहीं है। कुछ दिनों के भीतर आपको रिमाइंडर मिलने शुरू हो जाएंगे। आमतौर पर पहले ऑटोमैटेड मैसेज आते हैं और उसके बाद बैंक की वसूली टीम का फोन आता है। इस स्तर पर बैंक मामले को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं होता है।
निपटारा
ऐसे हो जाता है समस्या का निपटारा
एक किस्त चूक जाने पर बैंक फोन करके आपसे पूछता है कि यह लापरवाही के कारण हुई चूक थी या किसी बड़ी समस्या के कारण ऐसा हुआ है। अगर, आप कॉल का जवाब देते हैं और भुगतान के लिए एक स्पष्ट समय सीमा बताते हैं तो आमतौर पर बातचीत का लहजा विनम्र और औपचारिक रहता है। आपको विलंब शुल्क या पैनल्टी ब्याज देना होगा, जो जितनी देरी से किस्त जमा कराएंगे उतना ही बढ़ता जाता है।
असर
कब पड़ता है क्रेडिट स्कोर पर असर?
इसका क्रेडिट स्कोर पर तुरंत असर नहीं पड़ता है। बैंक भुगतान में देरी होने पर 30 दिन के बाद ही क्रेडिट ब्यूरो को इसकी जानकारी देती है। अगर, आप इससे पहले EMI चुका देते हैं तो इसे बकाया भुगतान नहीं मानते। इसकी रिपोर्ट हो जाती है तो स्कोर में गिरावट आ सकती है। यह पिछले रिकॉर्ड पर निर्भर करती है। समय पर भुगतान करने वालों पर असर सीमित होता है और पहले भी चूक हुई है तो गिरावट ज्यादा होगी।
नियम
क्या कहते हैं RBI के नियम?
बैंक के कॉल का जवाब नहीं देने और भुगतान नहीं होने पर उसके आंतरिक सिस्टम में अकाउंट ओवरड्यू से स्ट्रेस्ड श्रेणी में चला जाता है। गंभीर परिणाम तब शुरू होते हैं, जब EMI का भुगतान लंबे समय तक नहीं होता। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, होम लोन 90 दिनों तक भुगतान न होने पर ही नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बनता है। एक EMI का भुगतान न होने से आप उस सीमा के आस-पास भी नहीं पहुंचते।
सख्ती
इसके बाद शुरू होती है सख्त कार्रवाई
एक बार चूक होने पर वसूली एजेंट, कानूनी नोटिस या संपत्ति पर कब्जा करने की धमकी नहीं दी जाती। ये सब बहुत बाद में बार-बार चूक होने और औपचारिक नोटिस मिलने के बाद होता है। आपकी ब्याज दर और किस्त अवधि भी नहीं बढ़ती है। अगर, आप लंबे समय तक चूक जारी रखते हैं तो बैंक किस्त अवधि बढ़ाने या पुनर्भुगतान को पुनर्गठित करने का सुझाव दे सकते हैं। इन सबसे बचने के लिए किस्त का समय पर भुगतान करें।