ताइवान में वनप्लस CEO पीट लाउ के खिलाफ क्यों जारी हुआ गिरप्तारी वारंट?
क्या है खबर?
ताइवान में चीन की जानी-मानी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वनप्लस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीट लाउ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। ताइवानी अभियोक्ता का कहना है कि लाउ ने पिछले करीब 10 वर्षों में नियमों का उल्लंघन किया। आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति ताइवान से इंजीनियरों की भर्ती करवाई। यह मामला ताइवान के क्रॉस-स्ट्रेट एक्ट से जुड़ा है, जो मेनलैंड चीन की कंपनियों के कामकाज को नियंत्रित करता है।
आरोप
क्या हैं लाउ पर आरोप?
अभियोक्ता के मुताबिक, वनप्लस ने कथित तौर पर हांगकांग में एक शेल कंपनी बनाई। इसके बाद 2015 में बिना सरकारी मंजूरी ताइवान में एक ब्रांच खोली गई। इस टीम ने स्मार्टफोन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर काम किया। साथ ही वनप्लस डिवाइस की टेस्टिंग और वेरिफिकेशन भी किया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में लोकल अधिकारियों से जरूरी अनुमति नहीं ली गई, जिसे कानून के तहत अनिवार्य माना जाता है।
दावा
हायरिंग नियमों के उल्लंघन का दावा
क्रॉस-स्ट्रेट एक्ट के अनुसार किसी भी मेनलैंड चीनी कंपनी को ताइवान में हायरिंग से पहले अनुमति लेनी होती है। अभियोक्ता का दावा है कि वनप्लस ने इस नियम को नजरअंदाज किया। आरोप है कि चुपचाप 70 से ज्यादा इंजीनियरों को हायर किया गया। इस मामले में दो ताइवानी नागरिकों पर भी आरोप लगे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर लाउ की मदद की।
सख्ती
चीनी टेक कंपनियों पर ताइवान की सख्ती
यह मामला ताइवान की उस सख्त नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें चीनी टेक कंपनियों पर नजर रखी जा रही है। ताइवान अपने सेमीकंडक्टर और चिप इंजीनियरों को रणनीतिक संपत्ति मानता है। इससे पहले भी कई कंपनियों की जांच हुई है। वनप्लस का कहना है कि जांच के बावजूद उसका बिजनेस सामान्य रूप से चल रहा है, जबकि लाउ ने अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।