EPF का पैसा नौकरी छोड़ने के बाद क्यों नहीं निकालना चाहिए?
क्या है खबर?
नौकरी छोड़ने या करियर ब्रेक लेने के बाद सबसे बड़ा सवाल कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर उठता है। कई लोग सोचते हैं कि काम बंद होते ही EPF का फायदा भी रुक जाता है, इसलिए वे तुरंत पूरा पैसा निकाल लेते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह जल्दबाजी लंबी अवधि में नुकसान पहुंचा सकती है। EPF सिर्फ एक बचत खाता नहीं, बल्कि रिटायरमेंट की मजबूत तैयारी का साधन है, जिसे समझदारी से संभालना जरूरी होता है।
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नौकरी छोड़ने पर भी मिलता रहता है ब्याज
बहुत से लोगों को यह गलतफहमी होती है कि नौकरी न होने पर EPF में ब्याज मिलना बंद हो जाता है। जबकि हकीकत यह है कि 58 वर्ष की उम्र तक EPF बैलेंस पर ब्याज मिलता रहता है। जल्दी पैसा निकाल लेने से कंपाउंडिंग का फायदा रुक जाता है। लंबे समय तक पैसा खाते में रहने से यह धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और भविष्य में बड़ी रकम बन सकता है। इसलिए बिना जरूरत पूरा फंड निकालना समझदारी नहीं माना जाता।
#2
पांच साल से पहले निकासी पर लग सकता है टैक्स
अगर कोई कर्मचारी लगातार पांच साल की सेवा पूरी करने से पहले EPF निकालता है, तो उस पर टैक्स लग सकता है। पांच साल की सेवा पूरी होने पर निकासी आमतौर पर टैक्स फ्री रहती है। करियर की शुरुआत में बार-बार नौकरी बदलने वाले युवाओं को खास सावधानी बरतनी चाहिए। जल्दी निकासी से न सिर्फ टैक्स देना पड़ सकता है, बल्कि ब्याज का भी नुकसान होता है, जिससे कुल बचत कम हो जाती है।
#3
पैसा निकालने की जगह ट्रांसफर बेहतर विकल्प
नौकरी बदलने पर EPF निकालने के बजाय उसे नए नियोक्ता के तहत ट्रांसफर किया जा सकता है। यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN के जरिए यह प्रक्रिया आसान होती है। इससे सेवा अवधि जुड़ी रहती है और टैक्स लाभ भी मिलता रहता है। केवल मेडिकल इमरजेंसी या घर खरीदने जैसी जरूरत में आंशिक निकासी पर विचार करना चाहिए। इसके साथ ही, KYC और बैंक डिटेल्स अपडेट रखना जरूरी है ताकि भविष्य में कोई दिक्कत न हो।