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तेल सस्ता होने के बावजूद क्यों नहीं कम हुआ शिपिंग खर्च? यहां जानिए वजह
जहाज कंपनियां सुरक्षा कारणों से लंबे रास्तों का इस्तेमाल कर रही हैं

तेल सस्ता होने के बावजूद क्यों नहीं कम हुआ शिपिंग खर्च? यहां जानिए वजह

Jul 27, 2026
05:44 pm

क्या है खबर?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड भी 5 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया, लेकिन इसका फायदा अभी भारत की शिपिंग इंडस्ट्री तक नहीं पहुंचा है। समुद्री माल ढुलाई का खर्च अब भी ऊंचा बना हुआ है। जहाज कंपनियां सुरक्षा कारणों से लंबे रास्तों का इस्तेमाल कर रही हैं। इसका असर आयात और निर्यात से जुड़े कई क्षेत्रों पर भी दिखाई दे रहा है।

वजह

तेल सस्ता होने के बावजूद क्यों महंगी है शिपिंग?

जहाजों का खर्च केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता है।

कई जहाज बाब अल-मंडेब और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों से बच रहे हैं। इसके कारण उन्हें लंबा समुद्री सफर तय करना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत, चालक दल का खर्च, बीमा प्रीमियम और यात्रा का समय बढ़ रहा है।

यही वजह है कि तेल सस्ता होने के बावजूद माल ढुलाई का खर्च कम नहीं हो रहा और कंपनियों की कुल परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है।

आवागमन

समुद्री मार्गों पर कम हुआ जहाजों का आवागमन

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, केप्लर के शिपिंग डाटा में रविवार को बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से केवल 11 कमोडिटी जहाज गुजरे, जो कई महीनों का सबसे निचला स्तर रहा।

वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य से भी सप्ताहांत में प्रतिदिन 10 से कम कमोडिटी जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई।

सुरक्षा जोखिम के कारण जहाज कंपनियां अब भी वैकल्पिक और लंबे समुद्री मार्गों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दबाव लगातार बना हुआ है।

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असर

भारत के बंदरगाहों और कारोबार पर असर

इसका असर भारतीय बंदरगाहों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया से जुड़े कुछ समुद्री मार्गों पर माल ढुलाई का खर्च 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। 23 जुलाई को ड्रूरी वर्ल्ड कंटेनर इंडेक्स 40 फुट कंटेनर के लिए 4,374 डॉलर रहा, जो 26 फरवरी के स्तर से करीब 130 प्रतिशत अधिक था।

इससे निर्यातकों और आयातकों की लागत लगातार बढ़ रही है और सामान की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।

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मांग

सरकार से मदद की मांग

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) ने सरकार से बढ़ते फ्रेट चार्ज, अतिरिक्त शुल्क और बंदरगाहों की भीड़ को लेकर हस्तक्षेप की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक समुद्री रास्तों की सुरक्षा पूरी तरह सामान्य नहीं होती और जहाज पुराने मार्गों पर नहीं लौटते, तब तक शिपिंग खर्च ऊंचा बना रह सकता है।

इसका सबसे ज्यादा असर छोटे निर्यातकों और आयातकों के कारोबार पर पड़ने की आशंका है तथा उनकी लागत पर भी दबाव बना रहेगा।

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